उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित रूप से अवैध सरोगेसी (किराए की कोख) का संगठित नेटवर्क संचालित किया जा रहा है। इस रैकेट में महिलाओं की उम्र, कद-काठी और रंग-रूप के आधार पर उन्हें गर्भधारण कराने की कीमत तय की जाती है।
🔍 क्या है पूरा मामला?
एक निजी अस्पताल से जुड़े व्यक्ति ने दावा किया है कि उसके नेटवर्क के तहत कई महिलाएं “कोख किराए पर” देने का काम कर रही हैं। इस कथित नेटवर्क के मुताबिक:
सुंदर और आकर्षक महिलाओं के लिए 10 से 15 लाख रुपये तक की डील होती है
सामान्य महिलाओं को 4 से 5 लाख रुपये दिए जाते हैं
कुछ मामलों में कुंआरी लड़कियों को भी शामिल किया जाता है
यह भी दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश में ऐसे कई सेंटर सक्रिय हैं, जहां पुरुष के वीर्य से महिलाओं को गर्भवती कराया जाता है।
🧬 कैसे चलता है यह रैकेट?
संतानहीन दंपतियों को टारगेट किया जाता है, खासकर वे जिनकी IVF प्रक्रिया असफल हो चुकी हो
महिलाओं को गर्भधारण के बाद शुरुआती महीनों में घर पर रखा जाता है
पेट दिखने पर उन्हें अलग सेंटरों में शिफ्ट कर निगरानी में रखा जाता है
पूरी प्रक्रिया गोपनीय तरीके से संचालित की जाती है
⚖️ कानूनी पहलू
भारत में सरोगेसी को लेकर सख्त कानून लागू हैं। सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट 2021 के तहत:
व्यावसायिक सरोगेसी (पैसे लेकर कोख देना) पूरी तरह प्रतिबंधित है
केवल परोपकारी (altruistic) सरोगेसी की अनुमति है
अवैध गतिविधियों पर कड़ी सजा का प्रावधान है
🚨 प्रशासन और जांच
हालांकि इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि ये दावे सही पाए जाते हैं तो यह एक बड़ा संगठित अपराध हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस द्वारा जांच की संभावना जताई जा रही है।
🧠 सामाजिक और नैतिक सवाल
यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
महिलाओं के शोषण का खतरा
गरीबी और मजबूरी का फायदा उठाना
कानून की खुलेआम अनदेखी
📌 निष्कर्ष:
लखनऊ में सामने आया यह कथित सरोगेसी रैकेट न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज और मानवता के लिए भी चिंता का विषय है। यदि इस तरह के नेटवर्क सक्रिय हैं, तो उन पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।
लखनऊ में ‘किराए की कोख’ का बड़ा नेटवर्क उजागर, अवैध सरोगेसी रैकेट का दावा
