कटनी। जिले में आगामी विवाह मुहूर्तों, विशेष रूप से अक्षय तृतीया जैसे अवसरों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने बाल विवाह रोकथाम को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को समाप्त करने के लिए एक सशक्त, समन्वित और बहुस्तरीय कार्ययोजना तैयार की गई है।
प्रशासन द्वारा विकासखंड स्तर पर संबंधित क्षेत्र के एसडीएम की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय बाल विवाह रोकथाम दल गठित किए गए हैं। ये दल अपने-अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी रखेंगे और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। साथ ही, बाल विवाह निगरानी समितियों और कोर ग्रुप को भी सक्रिय किया गया है, जिन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे इस प्रकार की घटनाओं पर कड़ी नजर रखें।
कलेक्टर आशीष तिवारी ने स्पष्ट कहा है कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जिसका प्रभाव समाज और विशेष रूप से बालिकाओं के भविष्य पर बेहद नकारात्मक पड़ता है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि इस कुप्रथा के खिलाफ आगे आएं और जिला प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि बाल विवाह की कोई भी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम, संबंधित एसडीएम या महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारियों को तत्काल दी जा सकती है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बाल विवाह कराने या इसमें सहयोग करने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2006 की धारा 9, 10, 11 और 13 के तहत दोषियों को दो वर्ष तक का कारावास, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जाने का प्रावधान है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग ने विशेष रूप से हलवाई, प्रेस वाले, कैटरर्स, धर्मगुरु, समाज के मुखिया, बैंड-बाजा संचालक, घोड़ी वाले और ट्रांसपोर्टरों से अपील की है कि वे बाल विवाह से जुड़े आयोजनों में अपनी सेवाएं न दें। यदि कोई व्यक्ति या सेवा प्रदाता ऐसे आयोजनों में सहयोग करता पाया गया, तो उसे भी कानून के तहत आरोपी माना जाएगा और उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल बना बड़ा हथियार
बाल विवाह की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के तहत एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक बाल विवाह की घटनाओं की शिकायत दर्ज करा सकते हैं और संबंधित अधिकारियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले, तो वे तुरंत हेल्पलाइन नंबर 181, 1098, 100 या बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल (https://stopchildmarriage.wcd.gov.in�) पर सूचना दर्ज कराएं।
समाज की भागीदारी जरूरी
जिला प्रशासन का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से इस कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, इसके लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। कलेक्टर ने दोहराया कि बाल विवाह रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसमें जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
दर्पण 24 न्यूज की ओर से अपील है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाएं और एक सुरक्षित, शिक्षित एवं सशक्त समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
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