राजगढ़ (मध्यप्रदेश)।प्रदेश शासन द्वारा शासकीय कर्मचारियों की उपस्थिति को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए “सार्थक एप” में फर्जी हाजिरी का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो के आधार पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि विभाग के एक लोकसेवक ने घर बैठे ही अपनी उपस्थिति दर्ज कर ली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित कर्मचारी ने सार्थक ऐप की तकनीकी व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए अपने स्थान पर केंद्र पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से वीडियो कॉल कराया। इस दौरान ऐसा प्रतीत कराया गया कि वह स्वयं अपने कार्यस्थल पर मौजूद है और इसी आधार पर उपस्थिति दर्ज कर ली गई।
हालांकि, यह तकनीकी “जुगाड़” ज्यादा देर तक छुप नहीं सका। बताया जा रहा है कि ऐप में मौजूद लोकेशन ट्रैकिंग और अन्य डिजिटल सत्यापन प्रणाली ने इस गड़बड़ी को पकड़ लिया। तकनीक के जरिए यह स्पष्ट हो गया कि कर्मचारी वास्तव में मौके पर उपस्थित नहीं था, बल्कि कहीं और से उपस्थिति दर्ज कर रहा था।
🔳 सिस्टम को चकमा देने की कोशिश, लेकिन तकनीक बनी पकड़ का कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्थक ऐप में जीपीएस लोकेशन, टाइम स्टैम्प और रियल-टाइम वेरिफिकेशन जैसी सुविधाएं होती हैं, जिससे इस प्रकार की हेराफेरी को पकड़ना संभव हो जाता है। यही वजह रही कि यह मामला सामने आ सका।
🔳 विभागीय छवि पर असर, कार्रवाई की मांग
इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आम जनता का कहना है कि यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे कर्मचारी ही इस तरह की लापरवाही और फर्जीवाड़ा करेंगे, तो शासन की योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित होगा।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए।
🔳 प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि मामला संज्ञान में आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
निष्कर्षतः, शासन द्वारा पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विकसित की गई डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग करने की यह घटना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह दर्शाती है कि सिस्टम को चकमा देने की कोशिशें अब तकनीक के सामने ज्यादा देर टिक नहीं पा रहीं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों पर किस प्रकार की कार्रवाई होती है।
सार्थक ऐप में फर्जी उपस्थिति का खेल उजागर, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पर उठे सवाल,वीडियो कॉल के जरिए लगाई गई उपस्थिति, तकनीक ने खोली पोल,जांच की मांग तेज, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठी आवाज
