प्रयागराज/मुरादाबाद | दर्पण 24 न्यूज़/उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में ट्यूशन पढ़ने वाली हिंदू छात्राओं पर धर्मांतरण के दबाव और बुर्का पहनाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने न केवल आरोपियों की एफआईआर रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया, बल्कि मामले में वकीलों द्वारा बोले गए झूठ और घटना की भयावहता पर भी गंभीर टिप्पणी की है।
सीसीटीवी फुटेज ने उजागर की सच्चाई
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष (मुस्लिम छात्राओं के वकील) ने दलील दी थी कि हिंदू लड़की ने अपने भाई की नजरों से बचने के लिए स्वेच्छा से बुर्का मांगा था। हालांकि, जब कोर्ट में 5 मिनट का ऑडियो युक्त सीसीटीवी फुटेज पेश किया गया, तो सच्चाई कुछ और ही निकली:
जबरदस्ती का प्रमाण: फुटेज में स्पष्ट दिखा कि हिंदू छात्रा बुर्का पहनने से मना कर रही थी और उसे दो बार उतारकर फेंका। लेकिन आरोपी छात्राएं उसे डांटकर जबरन बुर्का पहना रही थीं।
कोर्ट की टिप्पणी: न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने कहा कि यह कहना पूरी तरह झूठ है कि लड़की ने अपनी मर्जी से बुर्का पहना। फुटेज में वह स्पष्ट रूप से विरोध करती सुनाई दे रही है।
ट्यूशन में ‘नमाज की प्रैक्टिस’ और ‘मांस’ का दबाव
पीड़ित छात्रा ने कोर्ट के समक्ष जो बयान दिए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। पीड़ित के अनुसार:
आरोपी छात्राएं ट्यूशन में मांस लेकर आती थीं और उसे जबरन खाने पर मजबूर करती थीं।
शुरुआत में उसे ‘तरी’ (ग्रेवी) चखने को कहा जाता था।
उसे नियमित रूप से नमाज पढ़ने की प्रैक्टिस कराई जाती थी ताकि वह इस्लाम की ओर आकर्षित हो सके।
पीड़ित की बहन पर भी इसी तरह का दबाव बनाया गया था।
कोर्ट का सख्त सवाल: कौन दे रहा है ऐसी प्रेरणा?
अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं के मन में इस तरह की कट्टरता कहाँ से आ रही है। कोर्ट ने कहा कि इतनी कम उम्र में यह प्रवृत्ति ‘अत्यंत खतरनाक’ है। पीठ ने सवाल उठाया कि “आखिर इन्हें यह सब करने के लिए कौन उकसा रहा है और उन्हें ऐसी प्रेरणा कहाँ से मिल रही है?”
कानूनी कार्यवाही: गिरफ्तारी पर से रोक हटी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में कठोर कदम उठाते हुए:
मुस्लिम लड़कियों द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की अपील को खारिज कर दिया।
एक आरोपी छात्रा, जिसकी गिरफ्तारी पर पहले रोक लगी थी, कोर्ट ने वह रोक तत्काल हटा ली और पुलिस को गिरफ्तारी के आदेश दिए।
वकीलों की भूमिका पर छिड़ी बहस
सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस बात की भी चर्चा तेज है कि मुख्य आरोपी पक्ष की पैरवी हिंदू वकील (शिव शंकर मिश्रा और आशुतोष उपाध्याय) कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट ने इस बात को भी नोट किया कि बचाव पक्ष ने ‘भाई से बचने के लिए बुर्का पहनने’ की झूठी कहानी गढ़कर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया।
निष्कर्ष:
यह मामला केवल दो छात्राओं के बीच का विवाद नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। दर्पण 24 न्यूज़ समाज से अपील करता है कि अपने बच्चों की गतिविधियों और उनके मित्र मंडली पर नजर रखें। कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन वैचारिक सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।
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मुरादाबाद धर्मांतरण मामला: ‘भाई का डर’ नहीं, बुर्के के पीछे थी जबरदस्ती; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खोली झूठ की पोल
