नोएडा। उत्तर प्रदेश के Noida स्थित एक होजरी गारमेंट्स फैक्ट्री में हुई हिंसक घटना ने कानून-व्यवस्था और औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस की शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि इस हिंसा में शामिल 70 से अधिक लोग ऐसे हैं, जिनका न तो किसी फैक्ट्री से संबंध था और न ही वे नोएडा के स्थानीय निवासी हैं।
बाहरी लोगों की एंट्री से बढ़ा शक
पुलिस जांच के अनुसार, बड़ी संख्या में बाहरी लोगों को सुनियोजित तरीके से ट्रकों के जरिए लाया गया था। इनका मकसद केवल फैक्ट्री परिसर में आगजनी और तोड़फोड़ करना था। इस मामले में पांच ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने इन बाहरी तत्वों को लाने में अहम भूमिका निभाई।
“मजदूर बिगुल दस्ता” पर आरोप
जांच एजेंसियों के रडार पर एक संस्था “मजदूर बिगुल दस्ता” आई है। पुलिस का दावा है कि इस संगठन से जुड़े लोग पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भड़काऊ सामग्री पोस्ट कर रहे थे। इन पोस्ट्स के जरिए मजदूरों को उकसाने और माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश की गई।
कामरेड अभिनव सिन्हा पर गंभीर आरोप
पुलिस के मुताबिक, “कामरेड” के रूप में पहचाने जा रहे Abhinav Sinha पिछले कुछ दिनों से नोएडा की विभिन्न होजरी फैक्ट्रियों में जाकर मजदूरों को भड़काने का काम कर रहे थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने मजदूरों के बीच असंतोष फैलाने और हिंसा के लिए माहौल तैयार करने में भूमिका निभाई।
कई “कामरेड्स” गिरफ्तार
घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें रूपेश, आकृति, सृष्टि और मनीषा शामिल हैं। पुलिस इन सभी से पूछताछ कर रही है और इनके नेटवर्क को खंगाल रही है।
मानेसर कनेक्शन भी आया सामने
जांच में यह भी सामने आया है कि इसी संगठन का संबंध Manesar में हुई एक अन्य हिंसक घटना से भी जुड़ा हो सकता है। मानेसर में एक सरकारी फैक्ट्री में हुई हिंसा के मामले में शनि, सार्थक, श्याम मूर्ति और वीरेंद्र उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं।
राजनीतिक कनेक्शन की भी जांच
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार कुछ लोग Samajwadi Party के नेताओं के संपर्क में थे। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है और कॉल डिटेल्स व डिजिटल सबूतों को खंगाला जा रहा है।
फंडिंग और मास्टरमाइंड की तलाश
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे फंडिंग कहां से आई और किसके इशारे पर यह साजिश रची गई। पुलिस आर्थिक लेन-देन, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है।
कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और श्रमिक आंदोलनों की आड़ में हिंसा की संभावनाओं पर चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
(दर्पण 24 न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
नोएडा की होजरी फैक्ट्री में हिंसा: साजिश, बाहरी लोगों की भूमिका और संगठनों पर उठे सवाल
