पन्ना/इंदौर/भोपाल।मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर इन दिनों एक गंभीर विवाद सामने आया है, जिसने विभाग की छवि और आंतरिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पन्ना जिले में एक 80 वर्षीय रिटायर्ड DSP के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना के विरोध में प्रदेश के वरिष्ठ सेवानिवृत्त IPS अधिकारी खुलकर मैदान में उतर आए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 7 अप्रैल को 80 वर्षीय रिटायर्ड DSP भरत सिंह चौहान अपनी 76 वर्षीय पत्नी के साथ ग्वालियर जा रहे थे। रास्ते में पन्ना पुलिस ने उन्हें सीट बेल्ट नहीं लगाने के आरोप में रोका। आरोप है कि मामूली ट्रैफिक उल्लंघन के मामले में पुलिस का रवैया अत्यधिक सख्त और असंवेदनशील रहा।
परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बुजुर्ग दंपत्ति ने अपनी उम्र और स्वास्थ्य का हवाला दिया, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब दोनों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया।
गंभीर धाराएं और गिरफ्तारी से बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि इस मामले में आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं, जबकि संबंधित हथियार लाइसेंसी बताया जा रहा है। इसके बाद बुजुर्ग दंपत्ति को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें तत्काल जमानत मिल गई।
इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या एक सामान्य ट्रैफिक उल्लंघन को इस स्तर तक बढ़ाना आवश्यक था, और क्या कार्रवाई के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाया गया।
पूर्व IPS अधिकारियों में आक्रोश
इस घटना के विरोध में इंदौर में मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ सेवानिवृत्त IPS अधिकारियों—जैसे अनिल कुमार, एस.के. दास, डी.एस. सेंगर और धर्मेंद्र चौधरी—ने पैदल मार्च निकालकर विरोध जताया। अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
पूर्व अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी पुलिस सेवा की गरिमा से जुड़ा हुआ है।
प्रमुख मांगें
पूर्व IPS अधिकारियों और विभिन्न संगठनों ने सरकार और पुलिस मुख्यालय के सामने कई मांगें रखी हैं:
पन्ना की SP निवेदिता नायडू को तत्काल पद से हटाया जाए
बुजुर्ग दंपत्ति के खिलाफ दर्ज FIR को निरस्त किया जाए
मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी या CID से कराई जाए
दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाए
वरिष्ठ नागरिकों और रिटायर्ड अधिकारियों के साथ व्यवहार को लेकर नई गाइडलाइन बनाई जाए
सरकार और पुलिस मुख्यालय पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश के पुलिस नेतृत्व पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कैलाश मकवाना के कार्यकाल में इस तरह की घटना को लेकर आलोचना हो रही है। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग उठ रही है।
आगे क्या?
सूत्रों के मुताबिक, यदि जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो विरोध और तेज हो सकता है। यह मुद्दा प्रदेश के अन्य शहरों—ग्वालियर और भोपाल—तक फैलने की संभावना जताई जा रही है।
निष्कर्ष
पन्ना की यह घटना केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि पुलिस के व्यवहार, संवेदनशीलता और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल बनकर उभरी है। अब देखना होगा कि सरकार और पुलिस विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या पीड़ित पक्ष को न्याय मिल पाता है।
पन्ना में बुजुर्ग रिटायर्ड DSP से कथित अभद्रता पर बवाल, पूर्व IPS अधिकारी सड़कों पर उतरे—SP पर कार्रवाई की मांग तेज
