संकल्प से समाधान की जीवंत मिसाल बनीं सरपंच ऋतु पांडे

कटनी/सिहोरा। मध्यप्रदेश के सिहोरा तहसील अंतर्गत आने वाले सुदूर ग्राम बुधारी की सरपंच श्रीमती ऋतु पांडे आज महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और जनसेवा की एक सशक्त पहचान बन चुकी हैं। उनका सफर केवल एक जनप्रतिनिधि बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सोच और संकल्प की कहानी है, जो पूरे गांव की तस्वीर बदलने का सामर्थ्य रखता है।
कला संकाय में स्नातक करने के बाद ऋतु पांडे का सपना एक सरकारी नौकरी हासिल करना था। इसी दिशा में उन्होंने इंदौरा पौड़ी और मंडई के माध्यमिक विद्यालयों में अतिथि शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं भी दीं। लेकिन किस्मत ने उनके लिए एक अलग रास्ता चुना—समाज सेवा और नेतृत्व का रास्ता। एक कृषक परिवार में विवाह के बाद उन्होंने खेती-किसानी में भी सक्रिय भूमिका निभाई और ग्रामीण जीवन की वास्तविक समस्याओं को नजदीक से समझा।
परिवार और पति के सहयोग से उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और चार वर्ष पूर्व पहली बार चुनाव लड़ते हुए ही सरपंच पद पर विजय हासिल की। यह जीत उनके लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि गांव के समग्र विकास का संकल्प थी।
विकास की नई इबारत
सरपंच बनने के बाद ऋतु पांडे ने गांव के विकास के लिए एक दूरदर्शी और प्रभावी कार्ययोजना तैयार की। उन्होंने सबसे पहले मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया। उनके नेतृत्व में ग्राम पंचायत बुधारी में सड़कों का जाल बिछाया गया, नालियों का निर्माण हुआ और पंचायत भवन का भव्य निर्माण कराया गया। इसके साथ ही पानी की टंकी, बाउंड्रीवॉल और पुल जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य भी पूरे किए गए, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया।
शिक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य पर विशेष जोर
ऋतु पांडे का मानना है कि किसी भी आदर्श गांव की नींव शिक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य पर टिकी होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने इन तीनों क्षेत्रों में विशेष प्रयास किए। गांव में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा दिया गया, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया गया और शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। आज बुधारी गांव इन तीनों क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए एक आदर्श गांव के रूप में उभर रहा है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
ऋतु पांडे का जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि महिलाओं को सही दिशा, अवसर और सहयोग मिले, तो वे समाज में बड़े बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने न केवल खुद को स्थापित किया, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
प्रेरणादायक यात्रा
आज बुधारी गांव की बदली हुई तस्वीर उनके दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयासों की कहानी बयां करती है। उनकी कार्यशैली और सोच ने यह साबित कर दिया है कि एक जनप्रतिनिधि अगर ईमानदारी और प्रतिबद्धता से काम करे, तो वह सीमित संसाधनों में भी बड़े परिवर्तन ला सकता है।
ऋतु पांडे दृढ़ता से मानती हैं कि नारी शक्ति का सम्मान और सशक्तिकरण ही देश को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। बुधारी गांव आज उनके इसी विश्वास और मेहनत का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
— दर्पण 24 न्यूज

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