समाज में संतुलित आवाज़ की अनदेखी: लोकेंद्र जैसे जमीनी कार्यकर्ताओं को क्यों नहीं मिल रहा समर्थन? 🔳 शांत, सरल और समर्पित व्यक्तित्व के बावजूद उपेक्षा का सवाल

कटनी/स्थानीय क्षेत्र।समाज के उत्थान की बात जब भी होती है, तो आमतौर पर आक्रामक और विवादित बयानों वाले चेहरे ज्यादा चर्चा में रहते हैं। लेकिन इसी भीड़ में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो बिना शोर-शराबे के, जमीन पर रहकर समाज के लिए वास्तविक काम कर रहे हैं। ऐसे ही एक नाम हैं लोकेंद्र, जो दलित समाज से आते हुए भी संतुलित विचारधारा के साथ अपने समुदाय और परिवार दोनों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
लोकेंद्र की खास बात यह है कि वे एक ओर भगवान और सनातन परंपरा में आस्था रखते हैं, तो वहीं दूसरी ओर B. R. Ambedkar के विचारों को भी सम्मान देते हैं। उनका मानना है कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष के साथ-साथ संयम और संवाद भी जरूरी है।
🔳 मेहनत और सामाजिक जागरूकता का संतुलन
लोकेंद्र न केवल अपने परिवार के लिए मेहनत कर रहे हैं, बल्कि समाज के मुद्दों को भी उठाते हैं। वे शिक्षा, जागरूकता और अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन बिना किसी भड़काऊ भाषा या विवाद के। उनके करीबी लोगों का कहना है कि “लोकेंद्र जैसे लोग समाज को जोड़ने का काम करते हैं, तोड़ने का नहीं।”
🔳 फिर भी समर्थन की कमी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि ऐसे शांत और सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति को समाज का अपेक्षित समर्थन क्यों नहीं मिल रहा। इसके विपरीत, समाज में कुछ ऐसे चेहरे तेजी से उभरते हैं जो आक्रामक भाषा, धार्मिक भावनाओं पर टिप्पणी और विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं।
इनमें Chandrashekhar Azad जैसे नेताओं का नाम अक्सर सामने आता है, जिनके समर्थकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसी तरह अन्य स्थानीय स्तर पर भी कुछ लोग तीखे और विभाजनकारी विचारों के कारण लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं।
🔳 क्या समाज दिशा भटक रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आज का दौर सोशल मीडिया और त्वरित लोकप्रियता का है, जहां तेज और विवादित आवाजें ज्यादा सुनी जाती हैं, जबकि शांत और जमीनी काम करने वाले लोग पीछे छूट जाते हैं।
लेकिन सवाल यह भी है कि क्या समाज को वास्तव में ऐसे ही नेतृत्व की जरूरत है? या फिर लोकेंद्र जैसे संतुलित, विचारशील और जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाना चाहिए?
🔳 समाज से अपील
दलित समाज के जागरूक वर्ग से यह अपील की जा रही है कि वे केवल भाषण और नारों के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के काम और सोच के आधार पर समर्थन दें। लोकेंद्र जैसे समाजसेवी, जो बिना किसी भेदभाव के समाज की सेवा कर रहे हैं, वास्तव में “सच्चे सेवक” हैं।
🔳 निष्कर्ष
समाज का भविष्य उन लोगों पर निर्भर करता है, जो उसे जोड़ने का काम करते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि लोकेंद्र जैसे शांत, सरल और समर्पित व्यक्तियों को पहचान और समर्थन मिले, ताकि समाज सही दिशा में आगे बढ़ सके।
(दर्पण 24 न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)

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