गेहूँ के अवैध भंडारण की सूचना देने पर मिलेगा 21 हजार रुपये तक का इनाम, नाम रहेगा पूरी तरह गोपनीय🔳 प्रशासन की सख्त पहल—बिचौलियों पर कसेगा शिकंजा, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

जबलपुर। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब गेहूँ के अवैध भंडारण की सूचना देने वाले नागरिकों को आकर्षक नकद इनाम दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य बिचौलियों और अवैध व्यापारियों की गतिविधियों पर रोक लगाना और वास्तविक किसानों को उनका हक दिलाना है।
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, गेहूँ के अवैध भंडारण की सूचना देने वाले व्यक्ति को जप्त की गई मात्रा के आधार पर पुरस्कार दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति 100 क्विंटल से 200 क्विंटल तक के अवैध भंडारण की जानकारी देता है, तो उसे 5 हजार रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा। वहीं, 200 से 500 क्विंटल तक की सूचना पर 11 हजार रुपये, और 500 क्विंटल से अधिक के अवैध संग्रहण की जानकारी देने पर 21 हजार रुपये तक का इनाम प्रदान किया जाएगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, जिससे आम नागरिक बिना किसी डर के प्रशासन का सहयोग कर सकें।
📱 व्हाट्सएप पर भी दे सकते हैं सूचना
प्रशासन ने इसके लिए एक विशेष मोबाइल नंबर 62691 13327 जारी किया है। इस नंबर पर नागरिक व्हाट्सएप के माध्यम से अवैध भंडारण से जुड़ी जानकारी, फोटो और वीडियो भेज सकते हैं। हर सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
🔳 कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर पहल
यह पहल कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर शुरू की गई है। इससे पहले धान उपार्जन के दौरान भी इसी प्रकार की योजना लागू की गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार भी नागरिकों के सहयोग से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
🔳 किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
प्रशासन के अनुसार, कई व्यापारी और बिचौलिए मंडियों से कम दाम पर गेहूँ खरीदकर उसे फर्जी तरीके से किसानों के नाम पर उपार्जन केंद्रों में बेचने का प्रयास करते हैं। इससे शासन को आर्थिक नुकसान होता है और वास्तविक किसान समर्थन मूल्य का लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) और कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों को कार्रवाई के लिए अधिकृत किया है। ये अधिकारी कृषि उपज मंडी समिति और कृषि विभाग के साथ मिलकर जांच और कार्रवाई करेंगे।
🔳 जनसहभागिता से मिलेगी सफलता
जिला प्रशासन का मानना है कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही इस तरह की अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकती है। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि वे आगे आकर ऐसी सूचनाएं साझा करें और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में सहयोग दें।
🔳 निष्कर्ष
यह पहल न केवल भ्रष्टाचार और अवैध व्यापार पर अंकुश लगाएगी, बल्कि किसानों को उनका उचित हक दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। प्रशासन की यह योजना जनहित में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।

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