कटनी। अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त पर जहां एक ओर विवाहों की धूम रहती है, वहीं इस बार जिला प्रशासन की सजगता और सतर्कता ने तीन संभावित बाल विवाहों को समय रहते रुकवाकर एक बड़ी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी अंकुश लगाया है।
कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए विशेष रणनीति के तहत एक सशक्त, समन्वित और बहुस्तरीय कार्ययोजना लागू की गई थी। इसके तहत संबंधित एसडीएम की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कोर टीम का गठन किया गया तथा जिला और विकासखंड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया।
इसी मुस्तैदी का परिणाम रहा कि प्रशासन की टीम ने कटनी शहर सहित ढीमरखेड़ा क्षेत्र में कुल 3 बाल विवाहों को समय रहते रुकवा दिया।
कटनी शहर में संयुक्त टीम की कार्रवाई
महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना मिली थी कि शहर के आधार कॉप क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका का विवाह कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग एवं कोतवाली थाना पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।
जांच के दौरान पाया गया कि बालिका की आयु मात्र 16 वर्ष है, जबकि बालक की आयु 22 वर्ष थी। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद परिजनों, बारातियों, बैंड और कैटरिंग कर्मियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी और बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका का विवाह कराना दंडनीय अपराध है।
प्रशासनिक समझाइश के बाद परिजन सहमत हुए और बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही विवाह करने का निर्णय लिया गया। इस कार्रवाई में महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस टीम के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।
ढीमरखेड़ा में रोके गए दो बाल विवाह
विकासखंड ढीमरखेड़ा के ग्राम संकुई में दो ऐसे मामलों का खुलासा हुआ, जहां 21 वर्ष से कम आयु के बालकों का विवाह तय किया गया था। एक बालिका की आयु 19 वर्ष और दूसरी की 20 वर्ष पाई गई, जबकि दोनों बालक वैधानिक आयु से कम थे।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं महिला बाल विकास विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाया कि विवाह के लिए पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना अनिवार्य है। कम आयु में विवाह कराना कानूनन अपराध है। टीम द्वारा मौके पर पंचनामा तैयार किया गया और परिजनों से लिखित सहमति ली गई कि वे बालकों की आयु पूर्ण होने के बाद ही विवाह करेंगे।
प्रशासन की मुहिम रंग लाई
जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान में लगातार निगरानी, सूचना तंत्र की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय रहते हस्तक्षेप कर न केवल बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोका गया, बल्कि समाज में कानून के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई गई।
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध सूचना की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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जिला प्रशासन की सतर्कता से टले 3 बाल विवाह, अक्षय तृतीया पर मुस्तैदी से हुई कार्रवाई
