(दर्पण 24 न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
वाराणसी। रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। काशी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक साहित्यकार एवं पद्मश्री सम्मानित श्रीनाथ खंडेलवाल की जिंदगी के अंतिम दिन अत्यंत पीड़ादायक परिस्थितियों में बीते। करोड़ों की संपत्ति के मालिक होने के बावजूद उन्हें अपने ही बच्चों की उपेक्षा का शिकार होना पड़ा और अंततः वृद्धाश्रम में ही उन्होंने अंतिम सांस ली।
❖ 2023 में मिला था पद्मश्री सम्मान
श्रीनाथ खंडेलवाल काशी के एक प्रतिष्ठित साहित्यकार थे, जिन्होंने आध्यात्मिक विषयों पर 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की थी। उनके साहित्यिक योगदान को देखते हुए वर्ष 2023 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वे एक आध्यात्मिक विचारक और समाज को दिशा देने वाले व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे।
❖ परिवार ने ही किया बेसहारा
जानकारी के अनुसार, श्रीनाथ खंडेलवाल के परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। बेटा व्यवसायी है, जबकि बेटी सुप्रीम कोर्ट में वकालत करती है। बताया जा रहा है कि करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद उनके ही बच्चों ने कथित रूप से उनकी संपत्ति अपने नाम करवा ली और बीमार अवस्था में उन्हें बेसहारा छोड़ दिया।
❖ वृद्धाश्रम बना आखिरी सहारा
सड़क पर असहाय स्थिति में मिले श्रीनाथ खंडेलवाल को समाजसेवियों द्वारा काशी के एक वृद्धाश्रम में भर्ती कराया गया। वहां उनकी निःशुल्क सेवा और देखभाल की गई। वृद्धाश्रम में रहते हुए उन्होंने संतोषपूर्वक जीवन बिताने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान एक भी परिजन उनका हालचाल लेने नहीं पहुंचा।
❖ अंतिम समय में भी नहीं पहुंचे अपने
स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। दुखद पहलू यह रहा कि जब उनके निधन की सूचना उनके बच्चों को दी गई, तब भी किसी ने अंतिम दर्शन तक करने की जहमत नहीं उठाई।
❖ चंदे से हुआ अंतिम संस्कार
आखिरकार समाजसेवियों ने ही आगे आकर उनका अंतिम संस्कार कराया। अमन नामक एक समाजसेवी ने चंदा इकट्ठा कर पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराया।
❖ समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना आज के समाज के लिए एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है—क्या आधुनिकता और स्वार्थ के चलते हम अपने मूल्यों और रिश्तों को भूलते जा रहे हैं?
👉 यह मामला न सिर्फ मानवीय संवेदनाओं को झकझोरता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि माता-पिता, जिन्होंने जीवनभर अपने बच्चों के लिए सब कुछ किया, आखिर उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों?
