कटनी। रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी से पहले प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सिकमी (बटाईदार) श्रेणी के किसानों और उन किसानों के पंजीयन का पुनः भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश जारी किए हैं, जिनके नाम भू-अभिलेख और पंजीयन में अलग-अलग दर्ज हैं।
शासन स्तर पर ई-उपार्जन पोर्टल के डाटा का रैंडम मिलान करने पर कई तरह की विसंगतियां सामने आई थीं। इसी के चलते यह निर्णय लिया गया है कि ऐसे सभी किसानों का जमीनी स्तर पर सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए। इसके लिए राजस्व विभाग को 31 मार्च तक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
कैसे होगा सत्यापन
सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट जिम्मेदारी तय की है—
तहसीलदार और नायब तहसीलदार सिकमी/बटाईदार एवं नाम में भिन्नता वाले 100% किसानों का भौतिक सत्यापन करेंगे
अनुविभागीय अधिकारी (SDO) द्वारा कुल सत्यापित डाटा में से 10% मामलों की रैंडम जांच की जाएगी
किसानों पर क्या पड़ेगा असर
प्रशासन ने साफ किया है कि जब तक राजस्व अमला इन किसानों के डाटा का भौतिक सत्यापन पूरा नहीं कर लेता, तब तक संबंधित किसान ई-उपार्जन पोर्टल पर अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक नहीं कर पाएंगे।
क्यों जरूरी हुआ यह कदम
दरअसल, पोर्टल पर दर्ज डाटा और वास्तविक भू-अभिलेखों में अंतर मिलने से खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई थी। शासन का मानना है कि इस सख्त सत्यापन से फर्जी पंजीयन पर रोक लगेगी और वास्तविक किसानों को ही समर्थन मूल्य का लाभ मिल सकेगा।
निष्कर्ष:
कटनी जिले में इस निर्णय से गेहूं खरीदी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है, हालांकि जिन किसानों के दस्तावेजों में विसंगति है, उन्हें समय रहते सत्यापन कराना जरूरी होगा, अन्यथा वे अपनी उपज बेचने से वंचित रह सकते हैं।
