दर्पण 24 न्यूज |संपादक दिनेश कुमार
जहां एक तरफ दुनिया के बच्चे स्कूल में एबीसीडी और पहाड़े सीख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ “कुछ खास संस्थान” बच्चों को सीधे “जेहादी पीएचडी” की तैयारी करवा रहे हैं। जी हां, खबर है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा अब अपनी नई “एजुकेशन पॉलिसी” के तहत 7 से 13 साल के मासूम बच्चों को आतंक की क्रैश कोर्स क्लास में दाखिला दे रहे हैं।
नया सिलेबस, नई सोच!
जहां हमारे यहां बच्चे “मेरा स्कूल सबसे अच्छा” पर निबंध लिखते हैं, वहीं इन स्कूलों में सिलेबस कुछ यूं है—
पहला पीरियड: “नफरत का इतिहास”
दूसरा पीरियड: “हथियारों का प्रैक्टिकल”
लंच ब्रेक: मुफ्त खाना (क्योंकि भूखा पेट विचारधारा नहीं समझता!)
तीसरा पीरियड: “दिमाग कैसे बंद करें 101”
एडमिशन के फायदे
माता-पिता के लिए भी ऑफर कम नहीं—
बच्चे को मुफ्त भोजन
साथ में मासिक भत्ता
और बोनस में “भविष्य अंधकारमय लेकिन पक्का”
यानी आज के समय में जहां अच्छी शिक्षा महंगी होती जा रही है, वहां ये “संस्थान” गरीबी को टारगेट कर एक नया “करियर ऑप्शन” दे रहे हैं—आतंकवाद में उज्ज्वल (या कहें विस्फोटक) भविष्य!
करियर गाइडेंस या ब्रेनवॉश?
विशेषज्ञों का कहना है कि ये “स्कूल” कम और “ब्रेनवॉशिंग सेंटर” ज्यादा हैं। यहां बच्चों को पढ़ाई कम, नफरत ज्यादा सिखाई जाती है। मासूम उम्र में खिलौनों की जगह बंदूक का सपना दिखाया जा रहा है।
दुनिया का सबसे खतरनाक ‘स्टार्टअप’
अगर देखा जाए तो ये एक तरह का “स्टार्टअप मॉडल” है—
कच्चा माल: मासूम बच्चे
निवेश: मुफ्त खाना और थोड़े पैसे
आउटपुट: कट्टर सोच वाले युवा
ROI (Return on Investment) भी इनका अजीब है—जितनी नफरत, उतना फायदा।
असली सवाल
क्या ये बच्चे खुद ये रास्ता चुनते हैं? या गरीबी, लालच और झूठे वादों की मजबूरी उन्हें इस अंधेरे में धकेल देती है?
दर्पण 24न्यूज़ की टिप्पणी:
जब दुनिया चांद पर कॉलोनी बसाने की सोच रही है, तब कुछ लोग आज भी बच्चों के दिमाग में बारूद भरने में लगे हैं। सवाल ये नहीं कि ये हो क्यों रहा है… सवाल ये है कि इसे रोकेगा कौन?
“नन्हें कदम, बड़ा ‘मिशन’ — आतंक की नर्सरी में एडमिशन ओपन!” पाकिस्तान में चली जा रही खतरनाक चाल
