डिजिटल युग में जहां इंसान खुद को अपडेट करने में पीछे रह जाता है, वहीं अब “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” यानी AI ने भावनाओं, विचारों और सम्मान तक को एडिट करना शुरू कर दिया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक AI-निर्मित वीडियो ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है—क्या तकनीक अब मर्यादा भी तय करेगी?
वीडियो में कानून को “हाथ जोड़ते” दिखाया गया है, जबकि जानकार बताते हैं कि कानून कभी हाथ नहीं जोड़ता, बल्कि “सल्यूट” करता है—वो भी अपने वरिष्ठों को, नियमों के तहत। ऐसे में सवाल उठता है कि AI के नाम पर यह कैसी कल्पना परोसी जा रही है?
सबसे बड़ा मुद्दा तब खड़ा हुआ जब इस वीडियो को लेकर लोगों ने कहा कि यह भारत के संविधान और डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा का सीधा अपमान है। क्योंकि संविधान में कानून को सर्वोच्च माना गया है, न कि किसी के आगे झुकने वाला।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई—
किसी ने इसे “रचनात्मक स्वतंत्रता” कहा, तो किसी ने “संविधान की खिल्ली उड़ाना”।
एक यूजर ने लिखा—
“अब AI हमें सिखाएगा कि कानून कैसे व्यवहार करता है? कल को ये बताएगा कि
दर्पण 24 न्यूज़ शासन से अपील करता है की ऐसे लोगों के उपर सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चहिये
