कटनी में विक्रमोत्सव: संस्कृति भी, सिस्टम भी और फोटो सेशन भी!

कटनी। भारतीय नववर्ष के शुभ अवसर पर 19 मार्च को बस स्टैंड ऑडिटोरियम में ‘विक्रमोत्सव’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। कागज़ों में यह आयोजन जितना भव्य दिख रहा है, ज़मीन पर उतना ही “व्यवस्थित” दिखेगा—ऐसा प्रशासन को पूरा भरोसा है और जनता को पूरा अनुभव।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10 बजे “कोटि सूर्य उपासना” से होगा। अब यह अलग बात है कि सूरज तो रोज़ ही उगता है, लेकिन सरकारी कार्यक्रमों में उसकी चमक कुछ ज़्यादा ही दिखती है—खासकर तब, जब मंच पर नेताओं और अधिकारियों की उपस्थिति हो।
इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें जिम्मेदारियों का ऐसा सुंदर बंटवारा किया गया है कि अगर कुछ गड़बड़ हो जाए तो जिम्मेदारी ढूंढना भी एक सांस्कृतिक खेल बन जाए। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने एसडीएम प्रमोद चतुर्वेदी को समन्वय अधिकारी बनाया है, जबकि नगर निगम, कॉलेज और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इसमें अपनी-अपनी “उपस्थिति” दर्ज कराएंगे—काम कम, फोटो ज्यादा।
कार्यक्रम में प्रमुख मंदिरों और शासकीय भवनों पर ब्रह्मध्वज स्थापित किया जाएगा। इससे आम जनता को यह संदेश मिलेगा कि परंपराएं जीवित हैं—बस रोज़मर्रा की समस्याओं के बीच कहीं दब सी गई हैं।
सबसे आकर्षक हिस्सा होगा “सम्राट विक्रमादित्य” का नाट्य मंचन। यह नाटक दर्शकों को इतिहास की याद दिलाएगा—जहां राजा न्यायप्रिय था, निर्णय समय पर होते थे और प्रजा संतुष्ट रहती थी। दर्शकों के मन में यह तुलना स्वतः उत्पन्न होगी कि क्या आज भी कुछ वैसा संभव है, या यह सिर्फ मंच तक ही सीमित है।
एसडीएम साहब ने नागरिकों से बड़ी विनम्रता से कार्यक्रम में आने की अपील की है। यह वही नागरिक हैं जो रोज़ गड्ढों से बचते हुए, बिजली-पानी की समस्याओं से जूझते हुए समय निकालेंगे और कार्यक्रम में पहुंचकर तालियां भी बजाएंगे—क्योंकि संस्कृति का सम्मान जरूरी है, भले ही व्यवस्था कभी-कभी उनका सम्मान भूल जाए।
सरकारी कर्मचारियों को “जीवंत सहभागी” बनने के निर्देश दिए गए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सहभागिता मंच तक सीमित रहती है या फिर कार्यक्रम के बाद भी व्यवस्था में कोई “जीवंतता” नजर आती है।
कुल मिलाकर, विक्रमोत्सव एक ऐसा आयोजन है जहां संस्कृति, प्रशासन और औपचारिकता तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। जनता आएगी, कार्यक्रम होगा, फोटो खिंचेंगे, खबरें छपेंगी—और फिर अगले साल तक सब कुछ सामान्य हो जाएगा।
दर्पण 24 न्यूज की विशेष सलाह:
अगर आप भी इस भव्य आयोजन में जाना चाहते हैं, तो समय से पहले पहुंचें—ताकि आपको कुर्सी भी मिल जाए और मंच पर बैठे लोगों की मुस्कान भी साफ दिखाई दे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *