दर्पण 24 न्यूज़ नई दिल्ली। रिपोर्टर दिनेश कुमार
मिडिल ईस्ट में युद्ध भले हजारों किलोमीटर दूर चल रहा हो, लेकिन उसका असली असर अब सीधे भारतीय रसोई तक पहुंच गया है। सरकार ने घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की वृद्धि कर दी है। यानी अब दाल-सब्जी के साथ-साथ जनता को “महंगाई का तड़का” भी झेलना पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से तेल-गैस के दाम उछल गए हैं। उधर भारत में आम आदमी सोच रहा है कि इजराइल और ईरान की लड़ाई आखिर उसकी रसोई में क्यों लड़ी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक अब देश के कई घरों में गैस सिलेंडर को देखकर वही भाव आएगा जो शादी में लड्डू देखकर आता है—
“सोच-समझकर इस्तेमाल करना पड़ेगा।”
रसोई में नई रणनीति
गैस महंगी होने के बाद देशभर में नई “घरेलू नीतियां” बननी शुरू हो गई हैं—
चाय अब दिन में दो बार की जगह एक बार बनेगी।
सब्जी की जगह उबला आलू राष्ट्रीय भोजन बनने की ओर।
और कई घरों में गैस बचाने के लिए रोटी-सब्जी की जगह चर्चा और बहस पकाई जाएगी।
गृहिणियों की प्रतिक्रिया
एक गृहिणी ने व्यंग्य में कहा—
“पहले हम पूछते थे आज खाने में क्या बनेगा, अब पूछते हैं आज गैस जलानी है या बचानी है।”
सरकार का तर्क
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से यह फैसला लिया गया है। हालांकि आम जनता का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार का रास्ता सीधे उनकी जेब से होकर जाता है।
जनता का निष्कर्ष
अब लोग मजाक में कह रहे हैं—
“मिडिल ईस्ट में मिसाइलें चल रही हैं और भारत में चूल्हे की आंच महंगी हो रही है।”
