नई दिल्ली। रंगों और खुशियों का त्योहार कही जाने वाली होली एक बार फिर यह याद दिला गई कि हमारे समाज में रंगों से ज्यादा जल्दी गुस्सा चढ़ता है। राजधानी दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें एक मासूम बच्ची द्वारा फेंका गया रंग भरा गुब्बारा किसी के कपड़ों से ज्यादा लोगों के धैर्य को भिगो गया — और आखिरकार एक युवक की जान ले बैठा।
घटना की शुरुआत बेहद सामान्य थी। एक 11 साल की बच्ची अपने घर की छत से होली खेल रही थी और रंग भरे गुब्बारे नीचे फेंक रही थी। तभी एक गुब्बारा सड़क से गुजर रही महिला पर जा गिरा। सामान्य परिस्थितियों में यह एक हंसी-मजाक का मौका हो सकता था — आखिर होली ही तो थी। लेकिन आज के दौर में धैर्य शायद सबसे दुर्लभ रंग बन चुका है।
बताया जाता है कि गुब्बारा पड़ते ही महिला और बच्ची के परिवार के बीच बहस शुरू हो गई। थोड़ी ही देर में बहस ने वही रूप ले लिया, जो आजकल हर छोटी बात में देखने को मिलता है — यानी गुस्सा, भीड़ और हिंसा।
कुछ समय बाद दूसरे पक्ष के लोग इकट्ठा होकर लौटे और विवाद इतना बढ़ गया कि 26 वर्षीय युवक तरुण पर हमला कर दिया गया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
यानी एक ऐसा त्योहार, जो लोगों को गले लगाने के लिए होता है, वहां लोग एक-दूसरे पर हाथ उठाने लगे।
घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और प्रदर्शन भी हुए। पुलिस ने मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। फिलहाल इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
व्यंग्य की बात यह है कि हम हर साल होली पर “बुरा न मानो होली है” कहते हैं, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग “बुरा मानने” के लिए ही जैसे तैयार बैठे रहते हैं।
शायद हमें अब रंगों से ज्यादा धैर्य और समझदारी की जरूरत है। क्योंकि अगर एक गुब्बारा किसी की जान ले सकता है, तो समस्या गुब्बारे में नहीं — हमारे गुस्से में है।
होली का गुब्बारा बना मौत का कारण: रंगों के त्योहार में इंसानियत फिर हुई फीकी
