“इंस्टाग्राम की पोस्ट से थाना बना ‘बैटल ग्राउंड’, लाइक-कमेंट की जगह चले पत्थर”

खंडवा।सोशल मीडिया पर एक पोस्ट क्या आई, खंडवा में कुछ लोगों ने मानो “ऑनलाइन बहस” को सीधे “ऑफलाइन एक्शन” में बदलने का फैसला कर लिया। इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक पोस्ट से नाराज भीड़ शिकायत करने मोघट थाने पहुंची, लेकिन शिकायत दर्ज कराने के बजाय ऐसा हंगामा किया कि थाना परिसर कुछ देर के लिए “कमेंट सेक्शन” से ज्यादा गरम हो गया।

बताया जा रहा है कि भीड़ ने अपनी नाराजगी जताने के लिए अनोखा तरीका अपनाया — इंस्टाग्राम पर रिपोर्ट करने की जगह सीधे थाने में पत्थरों की “रिपोर्टिंग” शुरू कर दी। पुलिस को भी समझ नहीं आया कि ये लोग शिकायत दर्ज कराने आए हैं या नया खेल “थाना प्रीमियर लीग” शुरू करने।

स्थिति इतनी “एक्टिव” हो गई कि पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को शांत करना पड़ा। इस दौरान प्रधान आरक्षक आनंद चौधरी, आरक्षक अंकुश भालेराव और चालक आरक्षक संजय भी घायल हो गए। यानी सोशल मीडिया की गर्मी का असर असली दुनिया में भी दिखाई दे गया।

मामले की गंभीरता देखते हुए अभिनव कुमार बारंगे (सीएसपी) तीन थानों की पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और हालात संभाले। वहीं महेंद्र तारणेकर (एडिशनल एसपी शहर) और राजेश रघुवंशी (एडिशनल एसपी ग्रामीण) भी थाने पहुंच गए।

थाना प्रभारी धीरेश धारवाल और प्रवीण आर्य ने रिजर्व पुलिस फोर्स के साथ मोर्चा संभालते हुए आधी रात को फ्लैग मार्च निकाला, ताकि लोगों को याद दिलाया जा सके कि इंस्टाग्राम की लड़ाई सड़क पर लड़ने का कोई सरकारी नियम अभी तक नहीं बना है।

पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम में 22 नामजद सहित कुल 47 लोगों के खिलाफ बलवा, शासकीय कार्य में बाधा और पथराव का मामला दर्ज किया है।

आजकल सोशल मीडिया पर लोग “ब्लॉक” करने की जगह “ब्लॉक उठाकर” चल देते हैं। अगर हर पोस्ट का जवाब पत्थर से दिया जाने लगे, तो शायद आने वाले समय में पुलिस को “सोशल मीडिया कंट्रोल रूम” के साथ “पत्थर कंट्रोल रूम” भी खोलना पड़े।

फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और शहर में शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।

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