रीवा में एक गृह प्रवेश कार्यक्रम अब धार्मिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। भाजपा कार्यकर्ता सीताराम साकेत के घर आयोजित कार्यक्रम में कथित तौर पर हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी किए जाने का आरोप लगा है। मामला तूल पकड़ते ही अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज मध्यप्रदेश मैदान में उतर आया और विश्वविद्यालय थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कार्यक्रम था शुभ, चर्चा हो गई अशुभ
जानकारी के अनुसार, गृह प्रवेश का कार्यक्रम धार्मिक विधि-विधान और मंगलाचरण के साथ होना था, लेकिन कुछ कथित वक्तव्यों ने माहौल को विवादित बना दिया। आरोप है कि मंच से ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जिन्हें समाज के एक वर्ग ने अपमानजनक बताया। देखते ही देखते “गृह प्रवेश” का वीडियो सोशल मीडिया की गलियों में टहलने लगा और बहस की आंधी चल पड़ी।
ज्ञापन में उठीं तीन प्रमुख मांगें
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज म०प्र० के प्रदेश सचिव पंडित सतीश चौबे के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट मांगें रखी गईं—
सीताराम साकेत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए
अभद्र टिप्पणी करने वाले व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई हो
आयोजन से समाज में तनाव फैलाने वालों की भूमिका की जांच हो
ज्ञापन में कहा गया कि धार्मिक आस्था पर टिप्पणी करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द से खिलवाड़ है।
राजनीति, आस्था और सोशल मीडिया का त्रिकोण
रीवा की राजनीति में यह पहला अवसर नहीं है जब धार्मिक भावनाएं बहस का विषय बनी हों। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले बातें चौपाल तक सीमित रहती थीं, अब सीधे “रील” और “स्टेटस” के रास्ते जनमानस तक पहुंच जाती हैं।
जिस घर में शांति और समृद्धि के लिए पूजा-पाठ हुआ, वहीं से विवाद की अग्नि की लपटें उठती दिखीं। अब सवाल यह है कि क्या यह महज शब्दों की चूक थी, या फिर भाषण की गर्मी में मर्यादा की सीमा लांघ दी गई?
पुलिस की भूमिका पर निगाहें
विश्वविद्यालय थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिक गई हैं। यदि शिकायत में तथ्य पाए जाते हैं, तो कानून के दायरे में कार्रवाई तय मानी जा रही है।
फिलहाल रीवा में चर्चा यही है कि “गृह प्रवेश” का शुभ मुहूर्त तो निकल गया, अब देखना है कि “कानूनी प्रवेश” कब और कैसे होता है।
