कटनी। बाल गंगाधर तिलक वार्ड क्रमांक 1 की लोकप्रिय पार्षद श्रीमती वंदना राज किशोर यादव ने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आगामी परिषद बैठक में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने की मांग की है। उन्होंने नगर निगम अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में नगर निगम में पदस्थ रहे कमिश्नरों की संख्या, उनके कार्यकाल और प्रशासनिक निर्णयों का ब्यौरा मांगा है।

पार्षद श्रीमती यादव ने विशेष रूप से यह प्रश्न उठाया है कि बीते दो वर्षों में कितनी बार कमिश्नरों के कार्यालय एवं शासकीय बंगले में तोड़फोड़ कर मरम्मत कराई गई तथा इस पर कुल कितनी राशि खर्च की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राशि जनता की गाढ़ी कमाई से आती है, इसलिए इसकी पारदर्शिता अनिवार्य है।
उन्होंने यह भी जानना चाहा है कि इन मरम्मत कार्यों के लिए विधिवत टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं। यदि टेंडर जारी किए गए तो उनकी लागत क्या थी, किस ठेकेदार को कार्य दिया गया और इसकी आवश्यकता क्या थी? पार्षद ने सवाल उठाया कि जब वार्डों के विकास कार्यों के लिए पार्षदों को यह कहकर टाल दिया जाता है कि “पैसा कहां से लाएं”, तो फिर कार्यालय और बंगले की बार-बार मरम्मत पर खर्च कैसे स्वीकृत हो जाता है?
श्रीमती यादव ने इसे संभावित फिजूलखर्ची करार देते हुए कहा कि शहर की जनता इस प्रकार के खर्च को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने मांग की है कि आगामी परिषद बैठक में सभी बिंदुओं पर स्पष्ट और लिखित जानकारी सदन के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
इसके अलावा, उन्होंने उन ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट करने की मांग की है, जिन्होंने टेंडर लेने के बावजूद एक वर्ष या उससे अधिक समय से वार्डों में निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं कराया। पार्षद ने पूछा है कि ऐसे ठेकेदारों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है और क्या उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है?
अब देखना यह है कि परिषद की बैठक में नगर निगम प्रशासन इन सवालों पर क्या जवाब देता है और क्या शहरवासियों को पारदर्शिता और जवाबदेही का भरोसा मिल पाता है।
