विजयसोता स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की मांग तेज, डीआरएम को सौंपा ज्ञापन – आंदोलन की चेतावनी

शहडोल/ब्योहारी। मध्य प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में गिने जाने वाले पपोंध क्षेत्र (विधानसभा ब्योहारी, लोकसभा सीधी, जिला शहडोल) में रेलवे सुविधाओं को लेकर जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है।

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने आज भारतीय रेलवे के जबलपुर मंडल के डीआरएम को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि विजयसोटा स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों का नियमित स्टापेज विजयसोटा स्टेशन पर सुनिश्चित किया जाए।


ज्ञापन में बताया गया कि यहां से कई ट्रेनें गुजरती हैं, लेकिन अधिकांश का ठहराव नहीं होने से क्षेत्र की जनता केवल ट्रेन की आवाज और हॉर्न सुनकर संतोष करने को मजबूर है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मांगों को उच्च स्तर पर भेजा जाएगा।
“स्टापेज नहीं तो आंदोलन”
ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि विजयसोटा स्टेशन पर ट्रेनों का स्टापेज शीघ्र शुरू नहीं किया गया तो क्षेत्रीय जनता आंदोलन करने को बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे विभाग की होगी।


सांसद को भी चेतावनी
क्षेत्रीय नागरिकों ने सीधी लोकसभा के सांसद डॉ. राजेश मिश्रा से भी हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि यदि ट्रेनों का स्टापेज नहीं हुआ तो इसका राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। बताया गया कि ब्योहारी विधायक द्वारा पहले भी सांसद को पत्र लिखकर स्टापेज की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
क्षेत्र की अन्य समस्याएं भी उठीं
ज्ञापन में सिर्फ रेलवे ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया—
रेलवे स्टेशन है, लेकिन ट्रेनों का ठहराव नहीं।
अस्पताल है, लेकिन डॉक्टर नहीं।
उप तहसील घोषित है, पर अधिकारी नहीं बैठते।
117 करोड़ की सिंचाई परियोजना कागजों में, लेकिन खेतों तक पानी नहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर घोषणाएं तो बहुत हुईं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ज्ञापन में उपस्थित प्रमुख लोग
शिवेंद्र सिंह – सरपंच संघ जिलाध्यक्ष, शहडोल
शिव कुमार (सिब्बू) मिश्रा – पोंडी अल्हरा
प्रभाकर मिश्रा – तेंदुहा
शिवप्रताप (अशोक) सिंह – हूआं
पिंकू मिश्रा – जमुनी
सहदेव जैसबाल – उमरगढ़
क्षेत्रीय जनता ने जल्द ही सांसद और अन्य जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर ट्रेनों के स्टापेज को लेकर पुनः निवेदन करने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर मांग पर कब तक ठोस निर्णय लेते हैं।

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