नई दिल्ली। 1 अप्रैल से देशभर में 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 अनिवार्य रूप से उपलब्ध होगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अधिसूचना के बाद यह तय हो गया है कि अब आपकी गाड़ी भी “आत्मनिर्भर” मिशन में सक्रिय भागीदारी निभाएगी—चाहे उसे बताया गया हो या नहीं।

सरकार का कहना है कि इससे प्रदूषण कम होगा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी। यानी अब आपकी बाइक का साइलेंसर भी राष्ट्रनिर्माण में योगदान देगा। धुआं थोड़ा कम निकलेगा, लेकिन चर्चा ज़्यादा होगी—“माइलेज कितना दे रही है?” इस सवाल पर देशभर के चाय ठेलों पर आपातकालीन बैठकें बुलाई जा सकती हैं।
किसान खुश, कार थोड़ी संशय में
एथेनॉल गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से बनता है। ऐसे में खेत से लेकर पेट्रोल पंप तक एक मीठी क्रांति की खुशबू बताई जा रही है। किसानों के लिए यह खुशखबरी है—अब गन्ना सिर्फ चीनी ही नहीं, इंजन की चाय भी बनाएगा।
उधर, पुरानी गाड़ियों के मालिकों में हल्की घबराहट है। मैकेनिकों के व्हाट्सऐप स्टेटस पहले ही अपडेट हो चुके हैं—“E20 स्पेशल सर्विस उपलब्ध है।” कुछ लोग अपनी 10 साल पुरानी बाइक से पूछ रहे हैं, “बेटा, तुम तैयार तो हो?” बाइक का जवाब अभी तक गोपनीय है।
माइलेज का गणित और मन का विज्ञान
विशेषज्ञ बताते हैं कि E20 से माइलेज में हल्का-फुल्का अंतर आ सकता है। लेकिन भारतीय जुगाड़ विज्ञान के अनुसार, अगर हवा सही दिशा में हो, टायर में हवा पूरी हो और ड्राइवर का मन प्रसन्न हो, तो माइलेज अपने आप बढ़ जाता है। वैज्ञानिक इस सिद्धांत की पुष्टि करने में व्यस्त हैं।
1 अप्रैल का संयोग
दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव 1 अप्रैल से लागू हो रहा है। जनता मजाक में पूछ रही है—“कहीं ये अप्रैल फूल तो नहीं?” लेकिन सरकार का कहना है कि यह फैसला गंभीर है, दीर्घकालिक है और पर्यावरण के हित में है। यानी मजाक तारीख का है, नीति का नहीं।
निष्कर्ष
E20 पेट्रोल के साथ देश एक नई ऊर्जा यात्रा पर निकल पड़ा है। अब देखना यह है कि गाड़ियां इस “मीठे मिश्रण” को कितनी सहजता से अपनाती हैं और जेब इसे कितनी सहजता से स्वीकार करती है। फिलहाल इतना तय है—पेट्रोल पंप पर अगली बहस का विषय मिल चुका है।
(दर्पण 24 न्यूज – जहां खबर में थोड़ा तड़का भी होता है!)
