सीधी में रिश्वत का ‘ईएमआई प्लान’ फेल, लोकायुक्त ने फिर पकड़ा वही खिलाड़ी!

सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में भ्रष्टाचार भी अब किस्तों में चलने लगा है। भू-अर्जन शाखा के कर्मचारी भूपेंद्र पांडेय को लोकायुक्त पुलिस रीवा ने 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। खास बात यह है कि यह पहला मौका नहीं है—आरोपी पहले भी लोकायुक्त के ट्रैप में आ चुका है। यानी अनुभव भी था और आत्मविश्वास भी!
मुआवजा 27 लाख, मांग 13 लाख!


ग्राम सदना निवासी शिकायतकर्ता शिवबहोर तिवारी की करीब 9 डिसमिल जमीन हाईवे परियोजना में गई थी। सरकार ने 27 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया। लेकिन आरोप है कि इस राशि को “रास्ता दिखाने” के लिए कर्मचारी ने 13 लाख रुपये की मांग कर डाली।
लगता है मुआवजा सरकारी था, पर दरवाजा “प्राइवेट लिमिटेड”!
शिकायतकर्ता के अनुसार, पहले भी मजबूरी में 1 लाख रुपये दिए जा चुके थे। इस बार दूसरी किस्त के रूप में 1 लाख रुपये देने की तैयारी थी और शेष राशि पांच दिन बाद देने का “मौखिक एग्रीमेंट” भी तय था। भ्रष्टाचार का यह ईएमआई मॉडल शायद वित्त मंत्रालय तक भी नहीं पहुंचा होगा!
ट्रैप ऑपरेशन: रंगे हाथों ‘कैश ऑन डिलीवरी’
शिकायत लोकायुक्त एसपी तक पहुंची। सत्यापन हुआ, योजना बनी और जैसे ही आरोपी ने रुपये स्वीकार किए—टीम ने उसे धर दबोचा।
इस तरह “कैश ऑन डिलीवरी” का ऑर्डर सीधे हवालात में डिलीवर हो गया।
लोकायुक्त थाना प्रभारी एस. आर. मरावी ने बताया कि शिकायत सही पाए जाने पर कार्रवाई की गई। साथ ही यह भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ पहले से एक आपराधिक प्रकरण दर्ज है। यानी अनुभव के बावजूद सबक अधूरा रह गया।
विभाग में हड़कंप, जनता में चर्चा
कार्रवाई के बाद विभागीय गलियारों में खामोशी और कानाफूसी का दौर जारी है। जनता के बीच सवाल गूंज रहा है—
क्या मुआवजा पाने के लिए भी अब “प्रोसेसिंग फीस” अलग से देनी पड़ेगी?
फिलहाल, लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने यह जरूर जता दिया है कि भ्रष्टाचार चाहे जितना अनुभवी क्यों न हो, कैमिकल पाउडर से रंगे नोट उसकी “काबिलियत” पर पानी फेर ही देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *