कटनी से राजकुमारी मिश्रा की रिपोर्ट
कटनी। कहते हैं सरकार जनता की सेवा के लिए होती है, लेकिन कटनी में चर्चा कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही है। मामला जुड़ा है कटनी के तत्कालीन पुलिस कप्तान अभिजीत रंजन और उनकी धर्मपत्नी नुपुर धमीजा रंजन से, जो पेशे से अधिवक्ता रहीं और जबलपुर हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करती थीं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या न्याय की राह सरकारी स्कॉर्पियो से होकर गुजरती है?
🚔 “रक्षित केंद्र” की विशेष सेवा?
सूत्रों के अनुसार, कटनी रक्षित केंद्र द्वारा एक स्कॉर्पियो (MP 20 ZE 9339) किराये पर ली गई। कागजों में इसका उपयोग सरकारी कार्यों के लिए दर्शाया गया, लेकिन आरोप यह है कि यह वाहन मैडम के कटनी से जबलपुर आवागमन में अधिक सक्रिय रहा।
गाड़ी कथित तौर पर कटनी निवासी श्रवण कुमार यादव की बताई जा रही है। अब यह जांच का विषय है कि विभाग में वाहन अटैच करते समय नियमों की कितनी “सख्ती” बरती गई और कितनी “सहजता”।
⛽ पेट्रोल पुलिस का, सफर निजी?
बताया जा रहा है कि करीब दो वर्षों तक इस वाहन में डलने वाले ईंधन का भुगतान पुलिस मद से होता रहा। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकारी पेट्रोल से पारिवारिक न्याय यात्रा संभव है?
👮 “चार जवान सुरक्षा में” या “विशेष एस्कॉर्ट सेवा”?
चर्चा यह भी है कि कप्तान साहब की पत्नी होने के नाते प्रतिदिन चार जवानों की ड्यूटी उनके साथ लगा दी गई। जिन नामों की चर्चा है, उनमें कौशलेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र वर्मान, भगवत सिंह और संजय गुनहारे शामिल बताए जा रहे हैं।
कहा जा रहा है कि जब भी मैडम कटनी से जबलपुर हाई कोर्ट जाती थीं, तीन जवान उनके साथ होते थे। मोबाइल लोकेशन, सीडीआर और टोल नाकों के सीसीटीवी फुटेज से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
यदि ऐसा है, तो यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए भी उपलब्ध है या सिर्फ “विशेष श्रेणी” के लिए?
🛣️ टोल टैक्स भी “सरकारी”?
चूंकि स्कॉर्पियो पुलिस विभाग में अटैच थी, इसलिए टोल टैक्स भुगतान नहीं किए जाने की भी चर्चा है। अब यदि सरकारी नंबर प्लेट का लाभ निजी यात्रा में लिया गया हो, तो यह “सुविधा विस्तार योजना” का अनोखा उदाहरण माना जाएगा।
⚖️ मामला पहुंचा जांच तक
जबलपुर हाई कोर्ट के अधिवक्ता राजकुमार सोनी ने शपथपत्र देकर मामले की जांच की मांग की है। जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा डीआईजी मनीष खत्री द्वारा जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि जांच की प्रगति पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
❓ बड़े सवाल
क्या सरकारी वाहन का उपयोग वास्तव में शासकीय कार्यों में हुआ?
क्या ईंधन और सुरक्षा बल की ड्यूटी नियमों के अनुरूप थी?
क्या दो वर्षों तक यह सब “प्रक्रिया” के तहत चलता रहा?
फिलहाल सच्चाई जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। लेकिन कटनी में लोग चुटकी ले रहे हैं—
“अगर हर वकील को ऐसी स्कॉर्पियो और एस्कॉर्ट मिल जाए, तो न्याय की रफ्तार सच में तेज हो जाएगी!”
दर्पण 24 न्यूज इस मामले की आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। जब तक सच सामने नहीं आता, तब तक यह खबर सवालों के आईने में खड़ी है।
