अलवर/सरिस्का, 22 फरवरी 2026।
सरिस्का टाइगर रिजर्व क्षेत्र के धोंधला गांव स्थित गौशाला परिसर में विकसित हर्बल पार्क इन दिनों जैव विविधता संरक्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां करीब 300 से अधिक दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों के पौधे तैयार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य अरावली और सरिस्का क्षेत्र में तेजी से घट रही वनस्पतियों को संरक्षित करना है।
हर्बल पार्क में 9 प्रकार की तुलसी, 4 प्रकार की हल्दी तथा सफेद और लाल चंदन के पौधों सहित कई औषधीय एवं पारंपरिक प्रजातियां विकसित की गई हैं। इसके अलावा गूगल, बीजा, अरोठा, मेहंदी, कुसुम, सोनामुखी, सालर, अंजन, कंजार, पाड़ल, कुम्भी और मिलावा जैसी वनस्पतियों का भी संरक्षण किया जा रहा है, जो अब लुप्तप्राय श्रेणी में पहुंचती जा रही हैं।
अरावली क्षेत्र की जैव विविधता बचाने की पहल
हर्बल पार्क के माध्यम से स्थानीय स्तर पर औषधीय पौधों को तैयार कर न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, बल्कि ग्रामीणों को भी इन पौधों को अपने घरों और खेतों में लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रजातियों को बड़े पैमाने पर पुनर्स्थापित किया जाए, तो अरावली क्षेत्र की पारिस्थितिकी को मजबूती मिलेगी।
जीवंत संग्रहालय बनाने की तैयारी
प्रबंधन की योजना है कि सरिस्का और अरावली क्षेत्र में पाई जाने वाली सभी प्रमुख जड़ी-बूटियों, फल-फूल, लताओं और औषधीय पौधों को एक ही स्थान पर रोपित कर इसे “जीवंत वनस्पति संग्रहालय” के रूप में विकसित किया जाए। पार्क को विभिन्न खंडों में विभाजित कर प्रत्येक पौधे के बारे में हिंदी और अंग्रेजी में जानकारी उपलब्ध कराने की भी तैयारी है, ताकि शोधार्थियों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को लाभ मिल सके।
ग्रामीणों को भी मिलेगा लाभ
हर्बल पार्क में तैयार पौधों को गांवों में वितरित करने की योजना है, जिससे किसान और ग्रामीण अपने खेतों में औषधीय एवं पारंपरिक प्रजातियां उगा सकें। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आय के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।
यह पहल सरिस्का क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
— दर्पण 24 न्यूज
