दर्पण 24 न्यूज विशेष रिपोर्ट
स्पेशल रिपोर्ट राजकुमारी मिश्रा
कटनी। नगर निगम कटनी में इन दिनों प्रशासनिक अनुशासन और आपसी संवाद का स्तर इतना ऊँचा हो गया है कि अब आवाज़ की ऊँचाई भी फाइलों में नापी जा रही है। ताज़ा प्रकरण में उपयंत्री शैलेंद्र प्यासी को तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया है। आदेश स्वयं आयुक्त तपस्या परिहार ने जारी किए हैं—साथ में यह पंक्ति भी जोड़ दी कि “जांच जारी रहेगी”, ताकि सरकारी गंभीरता बनी रहे।
मामला क्या था?
24 दिसंबर 2025 को आयोजित ‘लोक निर्माण एवं उद्यान समिति’ की बैठक में आरोप लगा कि उपयंत्री महोदय ने समिति सदस्य एवं पार्षद मिथिलेश जैन से तेज आवाज़ में बात कर ली। सूत्र बताते हैं कि आवाज़ की डेसीबल सीमा पर अभी कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन सिविल सेवा आचरण नियमों की भावना को ठेस पहुँचना ही पर्याप्त माना गया।
घटनाक्रम की सरकारी टाइमलाइन
5 जनवरी 2026 – अनुशासनहीनता के चलते निलंबन।
4 फरवरी 2026 – कारण बताओ नोटिस और आरोप पत्र।
10 फरवरी 2026 – लिखित स्पष्टीकरण, “भविष्य में ध्यान रखेंगे” वाला क्लासिक वाक्य।
20 फरवरी 2026 – चेतावनी के साथ बहाली।
यानी लगभग डेढ़ महीने में ‘सस्पेंड से ससम्मान वापसी’ का प्रशासनिक चक्र पूर्ण।
चेतावनी का महत्व
आदेश में स्पष्ट है कि निलंबन समाप्त, पर जांच जारी। यह वही स्थिति है जैसे छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल जाए, लेकिन रिजल्ट “जांचाधीन” रहे। स्थापना प्रभारी को जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दे दिए गए हैं—ताकि कागज़ी गंभीरता में कोई कमी न रहे।
निगम में संवाद की नई परिभाषा?
नगर निगम के गलियारों में चर्चा है कि अब बैठक में बोलने से पहले लोग वॉइस मॉड्यूलेशन की प्रैक्टिस करेंगे। कुछ कर्मचारियों ने तो मज़ाक में सुझाव दिया है कि अगली समिति बैठक में डेसिबल मीटर भी रखा जाए, जिससे यह तय हो सके कि “तेज” कितने को कहा जाए।
उधर, हालिया विवादों के बीच उपयंत्री महोदय ने मीडिया से दूरी बनाए रखी है। शायद वे समझ चुके हैं कि सरकारी सेवा में शब्दों से ज्यादा वजन ‘मौन’ का होता है।
निष्कर्ष
कटनी में फिलहाल विकास कार्यों से ज्यादा चर्चा “वाक्-शैली” की है। बहाली हो गई है, चेतावनी भी मिल गई है, जांच भी जारी है—यानि प्रशासन ने संतुलन साध लिया है। अब देखना यह है कि अगली समिति बैठक में मुद्दे ज्यादा उठेंगे या आवाज़?
