मध्य प्रदेश विधानसभा में भयावह खुलासा — 6 साल में 2.7 लाख महिलाएँ-लड़कियाँ लापता, 50 हजार अभी भी अता-पता नहीं

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में राज्य गृह विभाग द्वारा पेश किए गए आंकड़े महिला और बाल सुरक्षा की वास्तविक स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर रहे हैं। विधानसभा में दिये गये लिखित जवाब के अनुसार वर्ष 2020 से 28 जनवरी 2026 तक कुल 2,70,300 महिलाएं और बच्चियाँ लापता रहीं, जिनमें से पुलिस ने अधिकांश को बरामद किया है, लेकिन **लगभग 50 हजार से अधिक का अब भी कोई पता नहीं चल पाया है।**

📌 मुख्य आंकड़े (2020-28 जनवरी 2026)

श्रेणी

कुल मामले

बरामद

अभी भी लापता

महिलाएं

2,06,507

1,58,523

47,984

बच्चियाँ

63,793

61,607

2,186

कुल

2,70,300

2,20,130

50,170+

📅 साल दर साल ट्रेंड (गुमशुदगी की संख्या)

अंकड़े यह स्पष्ट दिखाते हैं कि पिछले वर्षों में हर साल लापता मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है:

2020: 31,405

2021: 39,564

2022: 43,148

2023: 46,291

2024: 50,798

2025: 54,897

2026 (28 जनवरी तक): 4,197

👉 यह संकेत है कि महिला-बालिकाओं के गायब होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

📊 रोज़ाना लगभग 130 महिलाएं और बच्चियाँ गायब

विश्लेषण यह भी कहता है कि औसतन हर दिन करीब 130 महिलाएं और लड़कियाँ राज्य में गायब हो रही हैं, जो केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि पूरे सामाजिक ढांचे पर एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

👩‍⚖️ राजनीतिक विवाद और सवाल

कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने इस संख्या को गंभीर मानते हुए कहा कि यह आंकड़े महिला सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़े करते हैं और कई मामलों में संगठित गिरोह या मानव तस्करी का एंगल भी जांच योग्य हो सकता है। उनकी मांग है कि उच्चस्तरीय SIT जांच किये जाये।

दूसरी ओर सरकार ने कुछ आलोचनाओं को राजनीतिक बयानबाज़ी बताया है, लेकिन आंकड़े रोकने का कोई ठोस रोडमैप अभी तक घोषित नहीं हुआ है।

🚨 महिला सुरक्षा पर व्यापक चिंताएँ

ये आंकड़े न सिर्फ अपराध की संख्या बढ़ने को दर्शाते हैं, बल्कि महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया, और सामुदायिक सुरक्षा ढांचे पर भी गंभीर सवाल उठाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समयबद्ध ट्रैकिंग, प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया, साइबर-ट्रैकिंग नेटवर्क और इंटर-स्टेट कोआर्डिनेशन को और सशक्त करना आवश्यक है।

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