भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकार द्वारा संचालित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और मुफ्त योजनाओं का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एक विश्लेषण के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष में करीब 43,090 करोड़ रुपए सीधे लोगों के खातों या खाद्य योजनाओं पर खर्च किए जाएंगे। यह राशि राज्य के लगभग 34 विभागों के कुल बजट के बराबर बताई जा रही है।
मध्यप्रदेश सरकार ने विशेष रूप से महिलाओं, किसानों और गरीब वर्ग को ध्यान में रखते हुए कई योजनाओं में बजट बढ़ाया है। इनमें सबसे अधिक राशि लाड़ली बहना योजना पर खर्च की जा रही है।
लाड़ली बहना योजना सबसे आगे
राज्य में लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने वाली लाड़ली बहना योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 23,882 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में हजारों करोड़ अधिक है।
अन्य प्रमुख योजनाओं पर खर्च
पोस्टर में दी गई जानकारी के अनुसार मुफ्त या प्रत्यक्ष लाभ वाली योजनाओं पर खर्च इस प्रकार रहेगा —
2800 करोड़ रुपए — मुफ्त राशन
1801 करोड़ रुपए — लाड़ली लक्ष्मी योजना
1413 करोड़ रुपए — उज्ज्वला गैस सब्सिडी (450 रुपए सिलेंडर सहायता)
5500 करोड़ रुपए — मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना (किसानों को सालाना 6000 रुपए)
7000 करोड़ रुपए — घरेलू उपभोक्ताओं को 100 रुपए में 100 यूनिट बिजली सब्सिडी
700 करोड़ रुपए — कक्षा 8 तक विद्यार्थियों को मुफ्त दूध योजना
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिजली बिल राहत जैसी अन्य सहायता जोड़ दी जाए तो लाभार्थी योजनाओं का दायरा और भी बड़ा हो जाता है।
बजट प्राथमिकताओं पर चर्चा
विश्लेषण में बताया गया है कि जिन 34 विभागों के बराबर यह खर्च है, उनमें पंचायत, ग्रामीण विकास, कृषि, संस्कृति, सहकारिता, खेल, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, पर्यटन, श्रम और खनिज जैसे विभाग शामिल हैं।
सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से गरीब और मध्यम वर्ग को सीधा लाभ मिल रहा है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी लाभ से जोड़कर देख रहा है।
राज्य में सामाजिक सुरक्षा और प्रत्यक्ष नकद सहायता योजनाओं का बढ़ता बजट आने वाले समय में वित्तीय प्रबंधन और विकास प्राथमिकताओं पर बड़ी बहस का विषय बन सकता है।
