पटना | दर्पण 24 न्यूज
बिहार विधानसभा के सत्र के दौरान सत्तापक्ष के ही दो विधायकों के तेवर उस वक्त तीखे नजर आए, जब उन्होंने विभागीय अफसरों और मंत्रियों के जवाबों पर खुलकर सवाल खड़े कर दिए। जाले सीट से भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री जिवेश कुमार मिश्रा और अलीनगर से भाजपा की युवा विधायक मैथिली ठाकुर ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को जोरदार ढंग से सदन में उठाया।
“अफसरों का लारा-लप्पा खेल नहीं चलेगा” – जिवेश मिश्रा
पूर्व मंत्री जिवेश कुमार मिश्रा ने गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर करारा हमला बोला। उन्होंने दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा थाना भवन निर्माण में वर्षों से हो रही देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विभाग में केवल कागजी खानापूर्ति चल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि फाइलें सालों से दौड़ रही हैं, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य का कोई अता-पता नहीं है। मिश्रा के तीखे सवालों के बाद सदन में हलचल मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
मैथिली ठाकुर ने स्वास्थ्य मंत्री के लिखित जवाब को किया खारिज
वहीं अलीनगर से भाजपा की सबसे युवा विधायक और प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने अपने क्षेत्र के अस्पताल की बदहाली को सदन में प्रमुखता से उठाया। जब स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की ओर से लिखित जवाब आया कि अस्पताल भवन जर्जर नहीं है और केवल मरम्मत की जरूरत है, तो मैथिली ठाकुर ने इस दावे से खुलकर असहमति जताई।
उन्होंने कहा कि कागजों में स्थिति भले ही ठीक दिखाई दे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी पर सदन में गरमाया माहौल
मैथिली ठाकुर ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वे उन्हें बचपन से काम करते देखती आई हैं, लेकिन उनके क्षेत्र की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि जिस अस्पताल में पहले दो एमबीबीएस डॉक्टर तैनात थे, आज वहां केवल एक आयुष चिकित्सक के सहारे इलाज चल रहा है।
उन्होंने क्षेत्र की जनता के हित में तत्काल एमबीबीएस डॉक्टरों की बहाली की जोरदार मांग की।
सदन में उठे इन मुद्दों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि योजनाओं और दावों के बीच जमीनी हकीकत कितनी अलग है। अब देखना होगा कि सरकार इन सवालों पर कितनी तेजी से ठोस कार्रवाई करती है।
