जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल “नीच” जैसे शब्द कह देने मात्र से SC/ST एक्ट स्वतः लागू नहीं हो जाता। एक्ट लागू करने के लिए यह साबित होना आवश्यक है कि अपमान जाति के आधार पर किया गया और आरोपी को पीड़ित की जाति की पूर्व जानकारी थी।
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी आईआईटी जोधपुर से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दी। कोर्ट ने पाया कि प्रकरण में जातिगत अपमान के ठोस साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए SC/ST एक्ट की धाराएं हटाई जाती हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में आईपीसी की अन्य धाराएं यथावत रहेंगी और उन पर विधि अनुसार कार्यवाही जारी रहेगी।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
सिर्फ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग SC/ST एक्ट लगाने के लिए पर्याप्त नहीं
यह साबित होना जरूरी कि अपमान जाति के कारण किया गया
आरोपी को पीड़ित की जाति की जानकारी होना भी आवश्यक शर्त
SC/ST एक्ट हटाया गया, लेकिन आईपीसी की धाराएं बरकरार
कानूनी हलकों में चर्चा
हाईकोर्ट के इस फैसले को कानून के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन कानून का प्रयोग तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही होना चाहिए।
यह फैसला भविष्य में SC/ST एक्ट से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई में एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है।
— दर्पण 24 न्यूज
