कटनी। जिले में शासकीय भूमि और प्राकृतिक जल स्रोतों पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन अब पूरी सख्ती के मूड में नजर आ रहा है। ग्राम खिरहनी स्थित रपटा नाले पर किए गए अवैध बाउंड्रीवॉल निर्माण मामले में कलेक्टर न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अपील खारिज कर दी है। कलेक्टर आशीष तिवारी के आदेश के बाद 24 मार्च को मौके पर कार्रवाई तय कर दी गई है।
अवैध निर्माण हटाने के निर्देश
प्रकरण में प्रवीण कुमार बजाज द्वारा दायर अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक नाले की भूमि पर बिना अनुमति किया गया कोई भी निर्माण अवैध है और उसे तत्काल हटाया जाना चाहिए।
नाले के अस्तित्व से छेड़छाड़
जांच में सामने आया कि रपटा नाले के समीप स्थित बरसाती नाले की भूमि पर बाउंड्रीवॉल खड़ी कर दी गई थी। पटवारी रिपोर्ट के अनुसार निर्माण नाले के अंदर तक किया गया, जिससे जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है और भविष्य में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
नियमों की अनदेखी
नगर एवं ग्राम निवेश विभाग की रिपोर्ट में कई गंभीर उल्लंघन पाए गए—
नाले और नदी की सीमा से 50 मीटर के भीतर निर्माण प्रतिबंधित होने के बावजूद निर्माण किया गया
अनुमोदित मार्ग को बाउंड्रीवॉल से अवरुद्ध किया गया
संबंधित भूमि पर किसी प्रकार की वैध अनुमति जारी नहीं की गई
पुराने रिकॉर्ड में दर्ज नाला
मिसल अभिलेख वर्ष 1907-08 में खसरा नंबर 442 को “शासकीय पानी मद” और “नाला” के रूप में दर्ज पाया गया है। इसके बावजूद वर्तमान में भूमि के निजी स्वामित्व में दर्ज होने पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच के आदेश
कलेक्टर ने मामले को गंभीर मानते हुए एसडीएम कटनी प्रमोद कुमार चतुर्वेदी को 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
24 मार्च को कार्रवाई, संयुक्त दल गठित
कलेक्टर के आदेश के पालन में एसडीएम द्वारा संयुक्त टीम गठित कर दी गई है। यह दल 24 मार्च को मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई करेगा। टीम में तहसीलदार, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, राजस्व निरीक्षक और पटवारी सहित राजस्व अमला शामिल रहेगा।
प्रशासन का सख्त संदेश
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कार्रवाई के साथ ही भूमि रिकॉर्ड में संभावित गड़बड़ी की जांच भी मामले को और गंभीर बना रही है।
