दर्पण 24 न्यूज़ की रिपोर्ट – “सच्चाई आप तक।”
नासिक (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के नासिक स्थित बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में पिछले चार साल से चल रहे एक सनसनीखेज धर्मांतरण और यौन शोषण रैकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए सात महिला पुलिसकर्मियों ने करीब एक सप्ताह तक कंपनी में कर्मचारी बनकर गुप्त रूप से काम किया और पुख्ता सबूत जुटाए।
कैसे हुआ खुलासा?
मामले की शुरुआत तब हुई जब कंपनी में काम करने वाली एक युवती के व्यवहार में अचानक बदलाव आया। जींस-टॉप पहनने वाली इस युवती ने अचानक सलवार-सूट पहनना और रमजान के महीने में रोजा रखना शुरू कर दिया। जब उसके सनातनी परिवार को शक हुआ और उन्होंने पूछताछ की, तो ऑफिस में चल रहे काले कारनामों की सच्चाई सामने आई।
खौफनाक आरोप: जबरन गौमांस खिलाने और दुष्कर्म की कोशिश
पीड़ित महिलाओं ने पुलिस को दिए बयान में रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे किए हैं। आरोपों के अनुसार:
महिला कर्मचारियों का मानसिक और शारीरिक शोषण कर उन्हें धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जा रहा था।
एक पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे जबरन गौमांस खिलाया गया।
ऑफिस के सुनसान इलाकों में छेड़छाड़ और मीटिंग के दौरान अभद्र व्यवहार किया जाता था।
एक अन्य पीड़िता के अनुसार, उसे कंपनी के बाहर ले जाकर दुष्कर्म भी किया गया।
पुलिस का ‘मास्टरस्ट्रोक’ ऑपरेशन
शुरुआत में सबूतों के अभाव में पुलिस कार्रवाई करने से हिचक रही थी। तब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में सात महिला पुलिसकर्मियों की एक स्पेशल टीम बनाई गई। इन महिला पुलिसकर्मियों ने पहचान बदलकर कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन किया और भर्ती होकर एक सप्ताह तक वहां की गतिविधियों पर नजर रखी। इस दौरान उन्होंने 40 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और अन्य साक्ष्य एकत्र किए।
अब तक की कार्रवाई
गिरफ्तारी: पुलिस ने अब तक कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक पुरुष कर्मचारी भी शामिल है।
फरार: एक महिला आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
प्रशासनिक लापरवाही: आरोप है कि एचआर मैनेजर अश्विनी चनानी को बार-बार शिकायत करने के बावजूद उन्होंने यह कहकर मामला दबा दिया कि “सभी कंपनियों में ऐसा ही चलता है।” फिलहाल उन्हें पुणे से हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
राजनीतिक हलचल और विरोध
इस घटना के सामने आने के बाद भाजयुमो (BJYM) के कार्यकर्ताओं ने कंपनी के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
