✍️ दर्पण 24 न्यूज, दिनेश कुमार संपादक कटनी
कटनी शहर में इन दिनों रसोई गैस से ज्यादा चर्चा “लाइन” की हो रही है। लोग गैस सिलेंडर लेने की उम्मीद लेकर एजेंसी पहुंच रहे हैं, लेकिन सिलेंडर से पहले उन्हें एक नई परीक्षा देनी पड़ रही है — केवाईसी (KYC)।
जैसे ही शहर में गैस सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आईं, वैसे ही उपभोक्ताओं को बताया जाने लगा कि पहले गैस कनेक्शन की केवाईसी कराना अनिवार्य है। परिणाम यह हुआ कि गैस एजेंसियों के बाहर अचानक लंबी-लंबी कतारें दिखाई देने लगीं। किसी के हाथ में आधार कार्ड है, किसी के पास राशन कार्ड, तो कोई पुरानी गैस बुक लेकर खड़ा है।
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब वर्षों से इसी कार्ड और इसी कनेक्शन पर हर महीने गैस सिलेंडर दिया जा रहा था, तब अचानक केवाईसी की याद क्यों आई? क्या रिकॉर्ड अभी तक ठीक थे और अचानक खराब हो गए, या फिर यह भी एक प्रशासनिक “नया प्रयोग” है?
शहर के कई लोगों का कहना है कि भारत में लाइन लगवाना अब व्यवस्था का हिस्सा बन गया है। कभी नोटबंदी के समय बैंकों के बाहर लंबी कतारें दिखीं, कभी कोविड टीकाकरण के दौरान अस्पतालों के बाहर भीड़ लगी, और अब गैस एजेंसियों के सामने लोग दस्तावेज़ लेकर खड़े हैं।
एक स्थानीय निवासी ने तंज कसते हुए कहा,
“लगता है देश में किसी भी समस्या का पहला समाधान यही है कि जनता को लाइन में खड़ा कर दो। जब लोग लाइन में लग जाएंगे तो सवाल पूछने का समय ही नहीं बचेगा।”
हालांकि गैस एजेंसियों का तर्क है कि केवाईसी प्रक्रिया उपभोक्ताओं के विवरण को अपडेट करने के लिए की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। लेकिन आम उपभोक्ता के लिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि गैस सिलेंडर कब मिलेगा।
कटनी में फिलहाल स्थिति यह है कि रसोई की आग से ज्यादा गर्म माहौल गैस एजेंसियों के बाहर दिख रहा है। लोग गैस लेने पहुंचे थे, लेकिन पहले उन्हें कागजों की जांच और लंबी कतारों की परीक्षा पास करनी पड़ रही है।
ऐसे में शहर में एक नया शब्द भी चल पड़ा है — “गैस नहीं, पहले केवाईसी”।
गैस सिलेंडर से पहले KYC की परीक्षा: कटनी में लाइनतंत्र का नया अध्याय
