(दर्पण 24 न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
अमरोहा (उत्तर प्रदेश)। आधुनिक युग में जहां एक ओर चिकित्सा विज्ञान तेजी से तरक्की कर रहा है और समय पर इलाज से गंभीर से गंभीर मामलों में भी लोगों की जान बचाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर अंधविश्वास आज भी कई जिंदगियों पर भारी पड़ रहा है। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से सामने आया है, जहां सांप के काटने के बाद एक किशोर की जान झाड़-फूंक और टोटकों के चक्कर में चली गई।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, अमरोहा जिले के एक गांव में एक किशोर को सांप ने डस लिया। घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों ने तुरंत उसे अस्पताल ले जाने के बजाय पारंपरिक झाड़-फूंक और ‘जहर उतारने’ के टोटकों का सहारा लिया।
बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने किशोर को करीब 12 घंटे तक गंगा नदी में डुबोकर रखा, इस विश्वास के साथ कि पानी में रखने से जहर उतर जाएगा। इस दौरान मौके पर कथित ओझा और झाड़-फूंक करने वाले लोग भी मौजूद रहे, जो लगातार अपने तरीके से ‘इलाज’ करते रहे।
हालत बिगड़ती गई, लेकिन नहीं लिया मेडिकल सहारा
समय बीतने के साथ किशोर की हालत लगातार बिगड़ती गई, लेकिन इसके बावजूद उसे अस्पताल नहीं ले जाया गया। परिजन और ग्रामीण अंधविश्वास के जाल में फंसे रहे और वैज्ञानिक इलाज को नजरअंदाज करते रहे।
काफी देर बाद जब किशोर की हालत बेहद गंभीर हो गई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उसकी मौत हो गई।
मौत के बाद भी जारी रहा टोटका
हैरानी की बात यह है कि किशोर की मौत के बाद भी अंधविश्वास का सिलसिला नहीं रुका। ग्रामीणों ने शव को गंगा में बहा दिया, यह मानते हुए कि इससे किसी प्रकार का ‘प्रभाव’ खत्म हो जाएगा।
यह घटना न सिर्फ मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती है, बल्कि समाज में फैले गहरे अंधविश्वास की भी भयावह तस्वीर पेश करती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने पर तुरंत अस्पताल ले जाना ही एकमात्र सही उपाय है। समय पर एंटी-वेनम (Anti-venom) देने से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार:
सांप के काटने के बाद देरी जानलेवा साबित हो सकती है
झाड़-फूंक या टोटके पूरी तरह बेअसर होते हैं
मरीज को शांत रखकर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना जरूरी है
प्रशासन और जागरूकता पर सवाल
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आज भी कई इलाकों में लोग चिकित्सा सुविधाओं के बजाय अंधविश्वास पर भरोसा कर रहे हैं, जो ऐसी दर्दनाक घटनाओं को जन्म देता है।
समाज के लिए सबक
अमरोहा की यह घटना एक कड़वा सच सामने लाती है—अंधविश्वास जानलेवा हो सकता है। जरूरत है कि लोगों को जागरूक किया जाए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समाज सभी मिलकर काम करें।
