खुले गड्ढे ने ली दो युवकों की जान, ‘अमृत योजना’ बनी मौत का जाल — नगर निगम की लापरवाही पर उठे सवाल

जबलपुर/रांझी। शहर में चल रहे विकास कार्य एक बार फिर जानलेवा साबित हुए हैं। रांझी थाना क्षेत्र के गोकलपुर इलाके में ‘अमृत योजना’ के तहत खोदे गए एक खुले गहरे गड्ढे ने दो युवकों को मौत के मुंह में धकेल दिया। यह दर्दनाक हादसा न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की भयावह सच्चाई भी सामने लाता है।
CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर
घटना का दिल दहला देने वाला वीडियो अब सामने आया है। CCTV फुटेज में साफ दिख रहा है कि रात के सन्नाटे में एक तेज रफ्तार बाइक सड़क से गुजर रही थी। तभी अचानक बाइक सड़क किनारे पड़े मिट्टी के ढेर से टकरा जाती है। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार युवक हवा में उछलकर सीधे लगभग 15 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरा।
पीछे बैठा दूसरा युवक भी संतुलन खो बैठता है और गड्ढे के किनारे आकर गिरता है। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच जाती है। आसपास के लोग दौड़कर पहुंचते हैं और घायलों को बाहर निकालने की कोशिश करते हैं।
‘अमृत योजना’ बनी खतरे की घंटी
जानकारी के मुताबिक, गोकलपुर क्षेत्र में ‘अमृत योजना 2.0’ के तहत पाइपलाइन बिछाने का कार्य जारी है। इसके लिए सड़कों को जगह-जगह खोदकर 15 से 20 फीट गहरे गड्ढे बनाए गए हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन खतरनाक गड्ढों के आसपास सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए।
न तो बैरिकेडिंग, न चेतावनी बोर्ड और न ही रात में दिखाई देने वाले रेडियम संकेत—ऐसे में राहगीरों और वाहन चालकों के लिए यह रास्ते किसी मौत के कुएं से कम नहीं हैं।
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नगर निगम और ठेकेदारों के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि कई दिनों से इस इलाके में खुदाई चल रही है, लेकिन सुरक्षा को लेकर पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह हुआ कि अब दो जिंदगियां इस लापरवाही की भेंट चढ़ गईं।
पुलिस ने दी जानकारी
रांझी थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी ने बताया कि गोकलपुर क्षेत्र में बाइक सवार दो युवक गड्ढे में गिर गए थे। घटना का CCTV फुटेज भी मिला है। दोनों घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि निर्माणाधीन क्षेत्रों में सावधानी बरतें और वाहन की गति धीमी रखें।
बड़ा सवाल — जिम्मेदार कौन?
यह हादसा कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
क्या विकास कार्यों के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है?
सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा?
आखिर कब तक नगर निगम और ठेकेदारों की लापरवाही यूं ही लोगों की जान लेती रहेगी?
निष्कर्ष
गोकलपुर की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो ऐसे गड्ढे और भी जिंदगियों को निगल सकते हैं। अब जरूरत है सख्त कार्रवाई और जिम्मेदारों पर कड़ी जवाबदेही तय करने की, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस दर्द से न गुजरे।
(दर्पण 24 न्यूज)

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