MP में बड़ा एक्शन: 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म, मुफ्त इलाज पर लगा ब्रेक

भोपाल/इंदौर/ग्वालियर/जबलपुर। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत 126 निजी अस्पतालों की मान्यता (इम्पैनलमेंट) समाप्त कर दी है। इस फैसले के बाद इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को मिलने वाली मुफ्त और कैशलेस इलाज सुविधा तत्काल प्रभाव से बंद हो गई है।
🔴 क्या है पूरा मामला
प्रदेश के चार प्रमुख शहर—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर—में कुल 398 अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हुए थे।
इनमें से 126 अस्पताल तय समय सीमा के भीतर NABH (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स) का प्रमाणपत्र या उससे जुड़ी जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके चलते सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए इनकी मान्यता रद्द कर दी।
📊 शहरवार आंकड़े
भोपाल – 51 अस्पताल
इंदौर – 30 अस्पताल
ग्वालियर – 33 अस्पताल
जबलपुर – 12 अस्पताल
🚫 अब क्या बदलेगा
इस कार्रवाई के बाद प्रभावित अस्पतालों में:
आयुष्मान योजना के तहत कैशलेस इलाज बंद
नए मरीजों के क्लेम स्वीकार नहीं होंगे
पहले से भर्ती मरीजों को दूसरे मान्यता प्राप्त अस्पतालों में शिफ्ट किया जा सकता है
⚠️ कार्रवाई क्यों हुई
आयुष्मान प्रबंधन के अनुसार, अस्पतालों को पहले ही नोटिस देकर आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए समय दिया गया था। बावजूद इसके कई अस्पताल नियमों का पालन नहीं कर पाए।
आयुष्मान भारत मध्यप्रदेश के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इलाज की गुणवत्ता सुधारने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
🏥 NABH सर्टिफिकेट क्यों जरूरी
नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (NABH) प्रमाणपत्र अस्पतालों की गुणवत्ता का राष्ट्रीय मानक माना जाता है।
इसमें 600 से अधिक मापदंडों पर अस्पतालों की जांच होती है, जिनमें शामिल हैं:
मरीजों की सुरक्षा
साफ-सफाई और हाइजीन
दवाओं की उपलब्धता
नर्सिंग और इमरजेंसी सेवाएं
सर्जिकल प्रक्रियाओं की गुणवत्ता
सरकार का मानना है कि NABH प्रमाणित अस्पतालों में मरीजों को अधिक सुरक्षित और बेहतर इलाज मिलता है।
📊 नई व्यवस्था: क्वालिटी बेस्ड पेमेंट
राज्य सरकार अब “क्वालिटी बेस्ड पेमेंट” सिस्टम लागू कर रही है:
फुल NABH सर्टिफिकेट वाले अस्पतालों को 115% तक भुगतान
एंट्री लेवल सर्टिफिकेट वाले अस्पतालों को भी अतिरिक्त प्रोत्साहन
🔄 क्या दोबारा मिल सकती है मान्यता?
हाँ, जिन अस्पतालों की मान्यता रद्द हुई है, वे भविष्य में NABH प्रमाणपत्र प्राप्त कर फिर से आयुष्मान योजना में शामिल हो सकते हैं।
🧾 क्या पड़ेगा असर
गरीब और जरूरतमंद मरीजों को तत्काल झटका
बड़े शहरों में इलाज के विकल्प सीमित
लेकिन सरकार का दावा—लंबे समय में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी
📰 निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत यह अब तक की सबसे बड़ी सख्त कार्रवाई मानी जा रही है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब योजना में बने रहने के लिए सिर्फ पंजीकरण नहीं, बल्कि गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य होगा।

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