नगर पालिका अध्यक्ष का अफसर को धमकी देने का मामला, वीडियो वायरल से मचा हड़कंप

शिवपुरी (मध्य प्रदेश)। जिले की नगर पालिका में उस समय विवाद की स्थिति बन गई जब नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में अध्यक्ष लेखा शाखा के अधिकारियों और कर्मचारियों को धमकाते हुए नजर आ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लेखा शाखा में पहुंचकर किया हंगामा
मिली जानकारी के अनुसार, 2 अप्रैल को नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा अपने पति संजय शर्मा और कुछ समर्थकों के साथ नगर पालिका की लेखा शाखा पहुंचीं। यहां पहुंचते ही उन्होंने कर्मचारियों से तीखे सवाल किए और उनके कार्य करने के अधिकार पर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि इस दौरान कुछ कर्मचारी माहौल को देखते हुए वहां से हट गए।
“मेरी अनुमति के बिना नहीं होगा एक रुपए का भुगतान”
वायरल वीडियो में अध्यक्ष साफ तौर पर यह कहते हुए सुनी जा सकती हैं कि उनकी अनुमति के बिना नगर पालिका में एक रुपए का भी भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कर्मचारियों को निर्देश दिए कि यदि सीएमओ (मुख्य नगर पालिका अधिकारी) की ओर से कोई आदेश भी आता है तो पहले उन्हें बताया जाए।
इतना ही नहीं, अध्यक्ष ने सीएमओ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें “चोर” तक कह दिया और यह भी कहा कि “सीएमओ आज है, कल नहीं रहेगा, लेकिन मैं अभी यहीं हूं।” इस बयान ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
बैंक खातों और फाइलों की मांगी जानकारी
घटनाक्रम के दौरान अध्यक्ष ने नगर पालिका के सभी बैंक खातों की जानकारी मांगी और उन्हें बंद कराने तक की बात कही। साथ ही ठेकेदारों के भुगतान से संबंधित फाइलें और कैशबुक भी अपने साथ ले जाने का आरोप लगा है।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इन दस्तावेजों के लिए किसी प्रकार की आधिकारिक पावती भी नहीं दी गई।
लेखाधिकारी ने की शिकायत, सुरक्षा की मांग
इस पूरे मामले के बाद लेखाधिकारी रविकांत झा ने नगर पालिका के सीएमओ इंशाक धाकड़ को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में उन्होंने अध्यक्ष पर अभद्र व्यवहार, धमकी और सरकारी दस्तावेज ले जाने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों के आचरण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर जहां जनप्रतिनिधि को विकास कार्यों की निगरानी का अधिकार होता है, वहीं इस तरह के व्यवहार को नियमों और मर्यादाओं के खिलाफ माना जा रहा है।
जांच और कार्रवाई की संभावना
मामले के तूल पकड़ने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित जनप्रतिनिधि के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है।
दर्पण 24 न्यूज इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, आपको अपडेट दी जाएगी।

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