जनगणना 2027 में बड़ा बदलाव: लिव-इन रिलेशनशिप को मिलेगा शादीशुदा का दर्जा, सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल के FAQ में खुलासा

नई दिल्ली | दर्पण 24 न्यूज
भारत की आगामी जनगणना 2027 को लेकर एक महत्वपूर्ण और सामाजिक रूप से बड़ा बदलाव सामने आया है। इस बार जनगणना प्रक्रिया में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को भी विशेष पहचान दी जाएगी। सेंसस के सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर जारी FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) के अनुसार, यदि कोई पुरुष और महिला बिना विवाह के एक ही घर में “स्थिर संबंध” (Stable Relationship) में रह रहे हैं, तो उन्हें शादीशुदा (Married) के रूप में दर्ज किया जाएगा।
🔍 क्या है नया प्रावधान?
जनगणना 2027 में पहली बार डिजिटल माध्यम से सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self Enumeration) की सुविधा दी जा रही है, जिसके तहत लोग स्वयं अपने परिवार और सदस्यों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इसी प्रक्रिया के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि—
यदि कोई कपल लंबे समय से एक साथ रह रहा है और खुद को एक स्थिर संबंध में मानता है
और वे एक ही घर में रहते हैं
तो उनके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर उन्हें “शादीशुदा” की श्रेणी में शामिल किया जाएगा
यह निर्णय पूरी तरह से कपल के स्वयं के बयान (Self Declaration) पर आधारित होगा, किसी कानूनी प्रमाण या विवाह प्रमाण पत्र की अनिवार्यता नहीं होगी।
💡 क्यों लिया गया यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में बदलते सामाजिक ढांचे और आधुनिक जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। महानगरों और शहरी क्षेत्रों में लिव-इन रिलेशनशिप का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन अब तक यह आधिकारिक आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होता था।
इस नई व्यवस्था से—
सामाजिक वास्तविकता का सही आंकलन हो सकेगा
परिवार संरचना से जुड़े डेटा अधिक सटीक होंगे
नीति निर्माण और सामाजिक योजनाओं में बेहतर मदद मिलेगी
📱 डिजिटल होगी जनगणना प्रक्रिया
जनगणना 2027 में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। पहली बार आम नागरिकों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प मिलेगा। इसके साथ ही पारंपरिक घर-घर जाकर डेटा संग्रहण की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।
⚖️ सामाजिक और कानूनी प्रभाव
इस फैसले को लेकर समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। जहां एक ओर इसे आधुनिक सोच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान माना जा रहा है, वहीं कुछ वर्ग इसे पारंपरिक विवाह व्यवस्था के लिए चुनौती के रूप में भी देख सकते हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह केवल जनगणना के आंकड़ों के लिए एक श्रेणीकरण है, इसका सीधा संबंध किसी कानूनी वैधता या विवाह के अधिकारों से नहीं होगा।
🗣️ विशेषज्ञों की राय
सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में बदलते पारिवारिक ढांचे को समझने और स्वीकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे सरकार को युवाओं की जीवनशैली, शहरीकरण और सामाजिक बदलावों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।
📌 निष्कर्ष
जनगणना 2027 में लिव-इन रिलेशनशिप को शादीशुदा श्रेणी में शामिल करने का निर्णय भारत के सामाजिक ढांचे में हो रहे बदलावों को दर्शाता है। यह न केवल डेटा संग्रहण की प्रक्रिया को आधुनिक बनाएगा, बल्कि समाज के बदलते स्वरूप को भी आधिकारिक मान्यता देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
✍️ दर्पण 24 न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट

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