दर्पण 24 न्यूज | विशेष रिपोर्ट
देश में पेट्रोल की कोई कमी नहीं थी, लेकिन “कमी की अफवाह” ने ऐसी आग लगाई कि अब पेट्रोल पंप से ज्यादा भीड़ घरों के ड्रमों में नजर आ रही है।
हालात ये हैं कि जिसे बाइक में 1 लीटर की जरूरत थी, वह अब 20 लीटर का ड्रम लेकर लाइन में खड़ा है। और मजे की बात ये कि कई लोग तो खाली ड्रम लेकर ही घूम रहे हैं—जैसे पेट्रोल नहीं, कोई खजाना भरने जा रहे हों!
एक सज्जन बोले, “भैया, ज़रूरत तो अभी नहीं है, लेकिन अगर कल खत्म हो गया तो?”
दूसरे ने जवाब दिया, “जब सब भरवा रहे हैं, तो हम क्यों पीछे रहें?”
बस यहीं से शुरू हुआ ‘डर का व्यापार’—जिसमें पेट्रोल कम और अफवाह ज्यादा बिक रही है।
पेट्रोल पंप पर काम कर रहे एक कर्मचारी ने हंसते हुए कहा,
“सर, पहले लोग 100-200 का पेट्रोल लेते थे, अब 2000 का भरवा रहे हैं… और आधे लोग तो सिर्फ डर के कारण!”
विशेषज्ञों का कहना है कि असली कमी पेट्रोल में नहीं, बल्कि ‘विश्वास’ में है।
अफवाहों की इस दौड़ में हर कोई ‘सुरक्षित’ रहना चाहता है, लेकिन अनजाने में वही हालात बना रहा है जिससे डर रहा है।
अब सवाल ये है—
क्या पेट्रोल खत्म होगा?
या फिर पहले हमारी समझ?
दर्पण 24 न्यूज की अपील:
पेट्रोल की नहीं, अफवाहों की टंकी खाली कीजिए… वरना अगली बार पानी के लिए भी ड्रम लेकर घूमना पड़ सकता है!
पेट्रोल खत्म नहीं हुआ… समझदारी खत्म हो गई!
