दर्पण 24 न्यूज़ | कटनी
कटनी। नगर निगम कटनी में जलकर (Water Tax) को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वर्ष 2013 में परिषद द्वारा अधिभार समाप्त करने और छूट देने का निर्णय लिया गया था, जबकि वर्ष 2025 में निगम अध्यक्ष मनीष पाठक ने फिर से चक्रवृद्धि ब्याज व अतिरिक्त वसूली को खत्म करने की मांग की।
लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी न छूट मिली, न ही जलकरदाताओं को राहत—अब मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी भी बन चुका है।
1. जलकर लगाने का अधिकार – कानून क्या कहता है?
मध्यप्रदेश में जलकर लगाने का अधिकार स्पष्ट रूप से कानून में दिया गया है:
मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 127 के तहत नगर पालिका/नगर निगम जलकर, सफाई कर आदि लगा सकती है
इसी कानून के अनुसार, जलकर की दर और वसूली का तरीका स्थानीय निकाय तय करता है
यानी:नगर निगम को टैक्स लगाने का अधिकार है, लेकिन मनमानी वसूली करने का नहीं।
2. वसूली और ब्याज के नियम
टैक्स वसूली नियम और बायलॉ के अनुसार होनी चाहिए
अतिरिक्त अधिभार या ब्याज तभी वैध है जब वह नियमों में स्पष्ट हो
बिना उचित नियम या परिषद के लागू किए गए निर्णय के, अतिरिक्त वसूली कानूनी विवाद का विषय बन सकती है
3. अगर निगम अपनी ही परिषद के फैसले लागू न करे तो?
कानून कहता है:परिषद का निर्णय लागू करना निगम की जिम्मेदारी है
यदि ऐसा नहीं होता तो यह प्रशासनिक लापरवाही माना जा सकता है
राज्य सरकार को अधिकार है कि वह हस्तक्षेप कर कार्रवाई करे
मतलब:2013 का फैसला लागू न होना खुद एक बड़ा प्रशासनिक सवाल है।
4. नागरिकों को परेशान किया जाए तो क्या प्रावधान है?
अगर नगर निगम गलत तरीके से वसूली करता है या जनता को प्रताड़ित करता है, तो:
✔️ (A) कानूनी कार्रवाई
नागरिक कोर्ट या हाईकोर्ट में याचिका लगा सकते हैं
गलत टैक्स या अवैध वसूली को चुनौती दी जा सकती है
✔️ (B) अपील का अधिकार
टैक्स के खिलाफ अपील/रीविजन का प्रावधान कानून में मौजूद है
गलत बिल या अतिरिक्त चार्ज को रुकवाया जा सकता है
✔️ (C) अधिकारियों पर कार्रवाई
अगर अधिकारी नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई संभव है
गंभीर मामलों में भ्रष्टाचार या दुरुपयोग पर जांच भी हो सकती है
5. सजा का क्या प्रावधान है?
मध्य प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1956 के अनुसार:
कानून का उल्लंघन करने पर ₹1000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है
और यदि गलती जारी रहती है तो प्रतिदिन अतिरिक्त जुर्माना भी लग सकता है
संशोधनों के बाद कुछ मामलों में जुर्माना ₹5000 तक भी हो सकता है
ध्यान देने वाली बात:
यह प्रावधान नागरिकों के साथ-साथ नियम तोड़ने वाले अधिकारियों पर भी लागू हो सकता है।
6. कटनी की वर्तमान स्थिति – सवालों के घेरे में सिस्टम
दोनों दस्तावेज़ साफ बताते हैं:
2013 → अधिभार समाप्त करने का निर्णय
2025 → फिर से ब्याज हटाने की मांग
2026 तक → जनता को राहत नहीं
यानी:कानून है, फैसला है… लेकिन लागू नहीं हुआ
7. जनता क्यों नाराज़ है?
चक्रवृद्धि ब्याज से बिल लगातार बढ़ रहे हैं
पुराने फैसलों का पालन नहीं हुआ
अन्य नगर निगमों में ऐसी वसूली नहीं हो रही
8. अब सबसे बड़ा सवाल
👉 क्या नगर निगम अपने ही फैसलों का पालन करेगा?
👉 क्या करदाताओं को उनका कानूनी अधिकार मिलेगा?
👉 या फिर मामला कोर्ट तक जाएगा?
✍️ दर्पण 24 न्यूज़
“कानून सबके लिए बराबर है… तो फिर राहत क्यों नहीं?”
“कागज़ों में राहत, ज़मीनी हकीकत में बोझ” — जलकर पर कानून क्या कहता है और जनता क्यों परेशान?
