दर्पण 24 न्यूज़ स्पेशल रिपोर्ट
श्रीनगर/बडगाम। जम्मू-कश्मीर के बडगाम सहित घाटी के कई इलाकों में इन दिनों बड़े पैमाने पर दान अभियान चलाया जा रहा है। इमामबाड़ों, मस्जिदों और दरगाहों में लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जहां बूढ़ों से लेकर छोटे बच्चों तक हर कोई अपनी क्षमता अनुसार दान कर रहा है।
दान में लोग सोने-चांदी के गहने, तांबे के बर्तन, नकद राशि और अन्य कीमती सामान दे रहे हैं। कई जगहों पर सड़कों के किनारे दान संग्रह के लिए स्टॉल लगाए गए हैं, वहीं स्वयंसेवक घर-घर जाकर भी सहयोग जुटा रहे हैं। खास बात यह है कि बच्चों ने भी इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए अपनी ‘ईदी’ तक दान कर दी है।
बडगाम, बारामूला, बांदीपोरा, गांदरबल और श्रीनगर जैसे शिया-बहुल इलाकों में लोग कतारों में खड़े होकर दान कर रहे हैं। कई स्थानों पर लोगों ने वाहन जैसे कार और मोटरसाइकिल तक दान करने की पेशकश की है। इस अभियान में शिया और सुन्नी दोनों समुदायों के लोग मिलकर भाग ले रहे हैं, जो सामाजिक एकजुटता का उदाहरण बन रहा है।
स्थानीय धर्मगुरुओं का कहना है कि यह पहल मानवता के समर्थन में है। एक सुन्नी धर्मगुरु ने बताया कि विभिन्न मतभेदों के बावजूद सभी लोग एकजुट होकर इस अभियान में हिस्सा ले रहे हैं। बच्चों द्वारा गुल्लक दान करना भी इस अभियान की खास झलक बनकर सामने आया है।
आयोजकों के अनुसार अब तक करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक का दान एकत्र किया जा चुका है और यह सिलसिला लगातार जारी है। यह अभियान ईद-उल-फितर के बाद शुरू हुआ और तेजी से पूरे क्षेत्र में फैल गया।
इस पहल की सराहना भारत स्थित ईरानी एम्बेसी ने भी की है और कश्मीर के लोगों की दरियादिली को सराहा है। वहीं प्रशासन ने भी दान संग्रह में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत संगठनों को अनुमति लेकर ही फंड इकट्ठा करना अनिवार्य किया गया है।
गौरतलब है कि हाल ही में घाटी में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद यह अभियान शुरू हुआ, जो अब एक बड़े मानवीय सहायता प्रयास का रूप ले चुका है।
