मध्य प्रदेश देसी शराब टेंडर 2026-27: सोम डिस्टिलरीज पर मेहरबानी के आरोप, जांच की मांग तेज

भोपाल। मध्य प्रदेश में वर्ष 2026-27 के देसी शराब टेंडर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि Som Distilleries and Breweries Ltd को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में जानबूझकर देरी और नियमों में ढील दी जा रही है। इस पूरे मामले ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में देसी शराब की दुकानों के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया को कई बार आगे बढ़ाया गया। आरोप यह है कि बार-बार तारीख बढ़ाने का उद्देश्य कुछ चुनिंदा कंपनियों—खासकर सोम डिस्टिलरीज—को तकनीकी और वित्तीय रूप से तैयारी का अतिरिक्त समय देना है।
विवाद के प्रमुख बिंदु
1. टेंडर में बार-बार देरी
टेंडर की अंतिम तिथि को कई बार बढ़ाया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की बात कही जा रही है। अन्य कंपनियों ने इसे निष्पक्ष प्रक्रिया के खिलाफ बताया है।
2. पारदर्शिता पर सवाल
निविदा प्रक्रिया में कथित बदलाव और शर्तों में ढील को लेकर विपक्ष और उद्योग से जुड़े लोगों ने सरकार पर एक ही कंपनी को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए हैं।
3. पुराना विवाद फिर चर्चा में
सोम डिस्टिलरीज पहले भी विवादों में रह चुकी है। वर्ष 2012 के एक मामले में नकली परमिट के जरिए शराब परिवहन के आरोप लगे थे। इस मामले में अदालत द्वारा दोषसिद्धि बरकरार रखने के बाद फरवरी 2026 में आबकारी विभाग ने कंपनी की सेहतगंज और रोजराचक स्थित दो इकाइयों के लाइसेंस निलंबित कर दिए थे।
4. हाईकोर्ट में मामला लंबित
कंपनी ने इस निलंबन को Jabalpur High Court में चुनौती दी है, जहां मामला अभी विचाराधीन है। इस कानूनी लड़ाई के चलते टेंडर प्रक्रिया पर और भी संदेह गहराया है।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है और उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई हुई है, तो यह सीधे-सीधे राजस्व और प्रशासनिक विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने वाला मामला है।
वहीं, सरकार की ओर से अब तक आधिकारिक तौर पर इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक विभागीय स्तर पर स्थिति की समीक्षा की जा रही है।
आगे क्या?
इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाते हुए दोबारा आयोजित किया जाएगा या फिर मौजूदा प्रक्रिया पर ही आगे बढ़ा जाएगा। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक संकट का रूप ले सकता है।
(दर्पण 24 न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट) स्त्रोत सोशल मीडिया

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