दर्पण 24 न्यूज़ | बड़ी खबर//कटनी।
कटनी से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक नगरी बिलहरी इन दिनों श्रद्धालुओं का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है। यहां का प्राचीन मां चंडी मंदिर बिलहरी भक्तों की आस्था का मुख्य धाम बना हुआ है, जहां दर्शन के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं।
दानवीर राजा कर्ण और चमत्कार की कथा

मंदिर के पंडाओं के अनुसार, इस भूमि पर महान दानवीर राजा कर्ण का शासन था। उनकी दानशीलता की कहानियां आज भी लोगों के बीच जीवित हैं।
मान्यता है कि राजा कर्ण प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर मां चंडी के दरबार पहुंचते थे… और मंदिर परिसर में रखे उबलते तेल के विशाल कढ़ाह में स्वयं कूद जाते थे।
इसके बाद मां चंडी स्वयं प्रकट होकर अमृत छिड़कती थीं… राजा कर्ण पुनर्जीवित हो जाते थे… और उन्हें ढाई मन सोना प्राप्त होता था।
चौंकाने वाली बात यह है कि उस सोने में से रोज सवा मन सोना वे गरीबों और जरूरतमंदों को दान कर देते थे… यही वजह है कि उन्हें आज भी दानवीर के रूप में पूजा जाता है।
विक्रमादित्य ने खोला रहस्य!
इस चमत्कार की चर्चा जब दूर-दूर तक फैली… तो महान सम्राट राजा विक्रमादित्य भी इस रहस्य को जानने बिलहरी पहुंचे।
कई दिनों तक निगरानी करने के बाद जब उन्होंने सच्चाई जानी… तो वे खुद भी कढ़ाह में कूद पड़े। कथा के अनुसार, मां के आशीर्वाद से उन्हें अक्षय पात्र और अमृत कलश की प्राप्ति हुई।
भक्ति में डूबा पूरा बिलहरी
नवरात्र के इस पावन अवसर पर पूरा बिलहरी नगर भक्तिमय हो गया है। मंदिर परिसर में घंटियों की गूंज, नारियल और अगरबत्ती की खुशबू, और “जय माता दी” के जयकारों से वातावरण गूंज रहा है।
श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि यहां मां चंडी के दर्शन मात्र से हर मनोकामना पूरी होती है… और इसी विश्वास के साथ दूर-दूर से परिवार यहां पहुंच रहे हैं।
बिलहरी, जिसे पुष्पावती नगरी के नाम से भी जाना जाता है, अपने प्राचीन मंदिरों, अद्भुत नक्काशी और ऐतिहासिक विरासत के लिए आज भी प्रसिद्ध है।
