कोलकाता/कटनी – चुनावी मौसम आते ही वादों का मानसून शुरू हो चुका है। ममता बनर्जी ने इस बार ऐसा घोषणापत्र पेश किया है कि आम जनता कैलकुलेटर लेकर बैठ गई है और सोच रही है – “इतना पैसा आएगा तो काम करने की जरूरत ही क्या है?”
(TMC) के इस “खुशहाल भविष्य” पैकेज में सामान्य एवं sc,st महिलाओं को हर महीने अलग अलग
1500, SC-ST महिलाओं को
1700 देने का वादा किया गया है।
यानी अब घर का बजट पति नहीं, सीधे सरकार संभालेगी!
उधर बेरोजगार युवाओं के लिए सालाना 18,000 “पॉकेट मनी” का ऐलान भी हुआ है। अब युवा नौकरी ढूंढें या पॉकेट मनी से ही “स्टार्टअप” शुरू कर दें – ये सोचने का विषय है। कुछ युवाओं ने तो खुशी में कहा – “अब मम्मी से पैसे मांगने की टेंशन खत्म, सीधे सरकार से मिलेंगे!”
सबसे बड़ा वादा – हर परिवार को पक्का घर। जनता ने भी तुरंत प्रतिक्रिया दी – “घर तो ठीक है, लेकिन उसमें EMI सरकार भरेगी या हम?”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणापत्र कम और “सपनों का Amazon सेल” ज्यादा लग रहा है – जहां हर चीज़ ‘फ्री-फ्री’ में मिल रही है।
विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा – “अगर ये सब सच में हो गया, तो देश के लोग काम छोड़कर सिर्फ घोषणापत्र पढ़ने लगेंगे!”
अब देखना यह है कि जनता इन वादों को “गिफ्ट पैक” समझती है या “एडवांस अप्रैल फूल”
दर्पण 24 की सलाह:
“चुनाव में वादे ऐसे ही आते रहेंगे, आप बस वोट डालते समय अपना दिमाग साथ लेकर जाइए… वरना अगली बार घोषणापत्र में ‘चांद पर प्लॉट’ भी मिल सकता है!”
