फ्री इलाज का ट्रैफिक सिग्नल: दुर्घटना हो तो डेढ़ लाख तक ‘सरकारी सहारा’!”

कटनी | दर्पण 24 न्यूज विशेस रिपोर्ट 
देश में अब सड़क पर चलते समय हेलमेट, सीट बेल्ट और भगवान के भरोसे के साथ एक और नया सहारा जुड़ गया है—“दुर्घटना हो जाए तो डेढ़ लाख तक फ्री इलाज”। जी हाँ, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री राहत योजना अब सड़क हादसों को थोड़ा “कम दर्दनाक” बनाने के मिशन पर है।
कहने को तो यह योजना घायलों को समय पर इलाज दिलाने के लिए है, लेकिन आम जनता के बीच इसकी चर्चा कुछ यूँ चल रही है—
“भाई, टक्कर लग जाए तो कम से कम इलाज का बिल तो नहीं आएगा!”
हालांकि, प्रशासन ने साफ किया है कि यह योजना इलाज के लिए है, एक्सीडेंट के लिए नहीं, लेकिन भारतीय जुगाड़ मानसिकता में लोग हर स्कीम का नया मतलब निकाल ही लेते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब दुर्घटना होते ही अस्पताल वाले पहले यह नहीं पूछेंगे कि “पैसे जमा किए?” बल्कि सीधे इलाज शुरू करेंगे। यह बदलाव सुनकर कई लोगों को भरोसा ही नहीं हो रहा—क्योंकि वर्षों से आदत रही है कि पहले काउंटर, फिर डॉक्टर।
इधर सीएमएचओ साहब ने बताया कि सरकारी के साथ 11 निजी अस्पताल भी इस योजना में शामिल हैं। यानी अब प्राइवेट अस्पताल भी कुछ समय के लिए “मानवता मोड” में रहेंगे—कम से कम डेढ़ लाख तक तो!
जनता के बीच इस योजना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ हैं:
कोई इसे “जीवनरक्षक” बता रहा है
तो कोई कह रहा है—“सरकार इलाज दे रही है, सड़कें कब ठीक होंगी?”
व्यंग्य यही है कि
देश में सड़कें पहले आपको गिराती हैं,
फिर सरकार आपको उठाने की व्यवस्था करती है!
फिलहाल प्रशासन की अपील है कि दुर्घटना में घायल को तुरंत अस्पताल पहुँचाएँ—क्योंकि इस बार इलाज में देरी का बहाना “पैसे नहीं हैं” नहीं चलेगा।
अंत में निष्कर्ष:
देश बदल रहा है…
अब दुर्घटना के बाद कम से कम इलाज का झटका नहीं लगेगा—
बाकी झटके तो सड़क पहले ही दे देती है!

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