डिजिटल इंडिया का चमकता सितारा: कटनी मुड़वारा स्टेशन की ‘रात की रौनक’, जहाँ मच्छर गाते हैं लोरी और पंखे लेते हैं ‘निर्वाण’!

कटनी | दर्पण 24 न्यूज़ स्पेशल रिपोर्ट

संवाददाता: दिनेश कुमार पांडेय

कहते हैं भारत बदल रहा है, डिजिटल हो रहा है, और रेलवे तो देश की प्रगति की ‘लाइफलाइन’ है। बुलेट ट्रेन के सपने देखे जा रहे हैं, लेकिन अगर यथार्थ का स्वाद चखना हो, तो रात के ठीक 1 बजे कटनी मुड़वारा रेलवे स्टेशन पधारें। यहाँ पहुँचकर आपको समझ आ जाएगा कि विकास की दौड़ में यह स्टेशन कैसे ‘कछुआ गति’ का ब्रांड एंबेसडर बना हुआ है। यहाँ ‘लाइफलाइन’ कब ‘डेंजर लाइन’ में बदल जाए, पता ही नहीं चलता।

🚮 स्वच्छता अभियान ने बदला रास्ता, गंदगी का अटूट साम्राज्य

स्टेशन पर कदम रखते ही पहला अहसास गंध का होता है। नजारा ऐसा कि मानो स्वच्छता अभियान ने कटनी की सीमा पर आते-आते अपना रास्ता बदल लिया हो। चारों तरफ गंदगी का ऐसा अटूट साम्राज्य फैला हुआ है कि लगता है कूड़ा-कचरा भी यहाँ ‘स्थायी निवास प्रमाण पत्र’ लेकर बैठ गया है। शायद कचरे को भी पूरा भरोसा है कि रेलवे का ‘स्वच्छता दस्ता’ उसे यहाँ से हटाने की जहमत कतई नहीं उठाएगा।

📉 पंखे ‘निर्वाण’ में, मच्छर ‘वीआईपी’ गेस्ट

अब बात करते हैं उन पंखों की, जो स्टेशन की छत पर लटके तो हैं, लेकिन काम करने की ‘लौकिक जिम्मेदारी’ से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। वे शायद ‘डिजिटल उपवास’ पर हैं। भीषण गर्मी और उमस में यात्री ऐसे बैठे नज़र आते हैं जैसे कोई प्राचीन ‘तपस्या’ कर रहे हों।

और मच्छरों की बात? भाई साहब! यहाँ तो उनका बाकायदा ‘वीआईपी’ स्वागत है। स्टेशन पर तैनात मच्छर मार मशीन भी स्थायी रूप से “आराम मोड” में है, जिससे मच्छरों को खुली छूट मिल चुकी है— “खाओ, पियो, यात्रियों को ‘किस’ करो और चैन की बंसी बजाओ।”

🔇 स्टेशन मास्टर ‘नॉट रीचेबल’, शिकायत करें तो किससे?

यात्रियों की पसीने से तरबतर परेशानी अपनी जगह, लेकिन असली ‘सस्पेंस थ्रिलर’ तब शुरू होता है जब कोई जागरूक यात्री इस बदइंतजामी की शिकायत करना चाहता है। पता चलता है कि स्टेशन मास्टर साहब का सरकारी मोबाइल बंद है। मानो वो भी इस नारकीय स्थिति से दूरी बनाकर किसी अज्ञात स्थान पर ‘मानसिक शांति’ प्राप्त कर रहे हों।

अब यात्री इस गंभीर धर्मसंकट में पड़ जाते हैं— “आखिर शिकायत करें तो करें किससे? काटते हुए मच्छरों से या बदबू मारती गंदगी से?”

🏆 “सबसे उपेक्षित स्टेशन” का निर्विरोध विनर

रेलवे प्रशासन की ओर से अगर कोई राष्ट्रीय पुरस्कार होता “सबसे अधिक उपेक्षित स्टेशन” का, तो कटनी मुड़वारा निश्चित रूप से बिना किसी मुकाबले के टॉप पर रहता। यहाँ की व्यवस्था (या अव्यवस्था) देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारी शायद पृथ्वी छोड़कर किसी और ग्रह की लंबी यात्रा पर निकल गए हैं।

यात्रियों का दर्द:

“यहाँ ट्रेन का इंतजार कम, और नर्क जैसे हालात से जूझना ज्यादा पड़ रहा है,” एक पसीने से लथपथ यात्री ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा।

🤔 दर्पण 24 न्यूज़ के कड़वे सवाल:

क्या रेल मंत्री का ‘विश्वस्तरीय स्टेशन’ का विजन सिर्फ बड़े महानगरों तक ही सीमित है?

क्या कटनी मुड़वारा जैसे छोटे शहरों के स्टेशन सिर्फ ‘कागजों में विकास’ की फोटो खिंचवाने के लिए हैं?

और सबसे बड़ा सवाल—क्या रेल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सिर्फ चुनावी घोषणाओं और विज्ञापनों में ही अच्छी लगती है?

जब तक इन सवालों के ठोस जवाब नहीं मिलते, तब तक कटनी मुड़वारा स्टेशन पर गंदगी का साम्राज्य, मच्छरों का राज और यात्रियों की लाचार मजबूरी यूं ही ‘डिजिटल इंडिया’ के गाल पर तमाचा मारती रहेगी।

(दर्पण 24 न्यूज़—जहाँ खबर में सच भी है और तीखे सवाल भी!)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *