कटनी | दर्पण 24 न्यूज
कटनी जिला अस्पताल, जहां लोगों को इलाज और जीवन की उम्मीद मिलनी चाहिए, वहीं अब बीमारी का नया “ओपन सोर्स” बनता नजर आ रहा है। अस्पताल परिसर में बायो-मेडिकल वेस्ट खुलेआम फेंका जा रहा है—जैसे कोई कचरा नहीं, बल्कि “सरकारी लापरवाही का प्रदर्शन” हो।
बताया जा रहा है कि अस्पताल के आसपास इस्तेमाल की गई सिरिंज, खून से सने बैंडेज, मेडिकल कचरा और अन्य खतरनाक वेस्ट खुले में पड़ा मिला। अब सवाल यह है कि क्या यह अस्पताल है या “संक्रमण फैलाने की प्रयोगशाला”?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नजारा कोई नया नहीं है। रोजाना यहां से गुजरने वाले लोग इस “खुले खतरे” के साथ जीने को मजबूर हैं। बच्चों के खेलने के पास ही यह खतरनाक कचरा पड़ा रहता है, मानो प्रशासन यह देखना चाहता हो कि “बीमारी कितनी तेजी से फैल सकती है।”
इधर मामला सामने आने के बाद सीएमएचओ (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) ने जांच के निर्देश जरूर दे दिए हैं। लेकिन कटनी की जनता अब पूछ रही है—
“जांच होगी या फिर यह भी कचरे के ढेर में दब जाएगी?”
व्यंग्य की बात यह है कि जिस विभाग की जिम्मेदारी लोगों को बीमारियों से बचाने की है, वही विभाग अनजाने में बीमारियों को “फ्री होम डिलीवरी” कर रहा है। नियमों के अनुसार बायो-मेडिकल वेस्ट का सुरक्षित निपटान होना चाहिए, लेकिन यहां तो नियम भी शायद छुट्टी पर हैं।
कागजों में सब कुछ “स्वच्छ” है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल खुद संक्रमण का केंद्र बनता जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो इलाज के लिए आने वाला मरीज ठीक होकर जाए या नई बीमारी लेकर—इसकी कोई गारंटी नहीं।
अब देखना यह है कि सीएमएचओ की जांच इस मामले में सच सामने लाएगी या फिर यह मामला भी “फाइलों में दफन” होकर रह जाएगा।
स्वास्थ्य की रखवाली या बीमारी की दलाली? कटनी जिला अस्पताल में ‘खुले में खतरा’”
