कंटेनर में करुणा की हत्या, और कानून ने ली एंट्री—तस्करों की ‘रात की डिलीवरी’ फेल”

कटनी के रीठी थाना क्षेत्र में बीती रात एक ऐसा “लोडिंग सिस्टम” पकड़ा गया, जिसे देखकर इंसानियत ने भी शायद आंखें फेर ली होंगी। पुलिस ने एक बंद बॉडी कंटेनर से 31 गोवंश को मुक्त कराया—जी हां, वही गोवंश जिनके नाम पर बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, लेकिन हकीकत में उन्हें माल की तरह ठूंस दिया जाता है।


देर रात की ‘स्पेशल डिलीवरी’ पर ब्रेक
तस्करों ने सोचा होगा कि आधी रात है, अंधेरा है, और कानून शायद सो रहा होगा। लेकिन रीठी पुलिस ने बता दिया कि “रात हमारी भी होती है।” मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी की और कंटेनर (UP21BN5175) को पकड़ लिया। हां, तस्कर जरूर अंधेरे में “गायब” हो गए—शायद उन्हें पहले से ही प्रैक्टिस थी।


कंटेनर खोला तो निकली क्रूरता की कहानी
जब पुलिस ने कंटेनर खोला, तो अंदर का नजारा किसी हॉरर सीन से कम नहीं था। 31 गाय, बैल और बछड़े—बिना चारे-पानी के, गर्दन-पैर बांधकर ऐसे भरे गए थे जैसे कोई सामान हो। लगता है तस्करों ने “मानवता” को पहले ही रास्ते में उतार दिया था।


कानून भी आखिर जाग गया
उपनिरीक्षक विनोद पटेल की शिकायत पर आरोपियों—रेखा बाई, शील चंद और दो अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उन पर मध्य प्रदेश गो-वंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत कार्रवाई की गई है।
यानी अब “क्रूरता” का हिसाब किताब कानून करेगा।
गौशाला में मिला नया जीवन
सभी गोवंश को सुरक्षित गौशाला भेज दिया गया है, जहां उनका इलाज और देखभाल हो रही है। दूसरी तरफ पुलिस फरार तस्करों की तलाश में है—उम्मीद है वे भी जल्दी “बरामद” हो जाएंगे, बस कंटेनर में नहीं, थाने में।
व्यंग्य की बात ये है…
एक तरफ समाज में गाय के नाम पर भावनाएं उफान मारती हैं, दूसरी तरफ वही गाय कंटेनर में ठूंसी मिलती है। सवाल ये नहीं कि तस्कर कौन हैं—सवाल ये है कि आखिर इंसान कब इंसान बनेगा?

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