कटनी, रीठी से विशेष रिपोर्ट – दर्पण 24 न्यूज
जनपद पंचायत रीठी में चुनाव का माहौल है, और माहौल ऐसा कि जैसे लोकतंत्र खुद निरीक्षण के लिए निकल पड़ा हो। मंगलवार को होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले सोमवार को प्रेक्षक महोदय श्री प्रकाश व्यास जी ने ऐसा निरीक्षण किया कि कुर्सियाँ तक सीधी होकर बैठ गईं और टेबलों ने भी खुद को सरकारी फाइलों के लायक समझ लिया।
कहा जा रहा है कि जैसे ही प्रेक्षक जी की गाड़ी परिसर में दाखिल हुई, वैसे ही धूल भी अनुशासन में आ गई और हवा ने भी तय कर लिया कि अब धीरे-धीरे ही चलेगी — आखिर लोकतंत्र का सवाल जो ठहरा।
निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर खास ध्यान दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा इतनी कड़ी रखी गई है कि अब बिना अनुमति के एक मच्छर भी अंदर घुसने से पहले सोच रहा है कि कहीं उसे भी वोटर लिस्ट में नाम तो नहीं जुड़वाना पड़ेगा।

पेयजल की व्यवस्था देखी गई — नल चालू करके यह सुनिश्चित किया गया कि पानी वास्तव में आ भी रहा है या सिर्फ फाइलों में ही बह रहा है। शौचालयों का निरीक्षण भी हुआ, जहाँ वर्षों से बंद दरवाजों ने पहली बार किसी अधिकारी का स्वागत किया। अंदर की स्थिति देखकर शायद शौचालय खुद भी सोच रहे होंगे — “आज हमारी भी सुनवाई हो गई!”
प्रकाश व्यवस्था का जायजा लेते समय बल्बों को भी एहसास हुआ कि उनका असली काम सिर्फ रात में जलना ही नहीं, बल्कि निरीक्षण के समय चमकना भी है। कुछ बल्ब तो इतने भावुक हो गए कि बिना बिजली के भी चमकने की कोशिश करते नजर आए।
बैठने की व्यवस्था पर खास जोर दिया गया। कुर्सियों को इस तरह सजाया गया जैसे वे किसी शादी समारोह में बारात का इंतजार कर रही हों। फर्क सिर्फ इतना था कि यहाँ बारात नहीं, बल्कि वोट की गिनती का नाच होना है।
एसडीएम श्री प्रमोद चतुर्वेदी, सीईओ श्री राजेश नरेंद्र सिंह और लाइजनिंग अधिकारी श्री अतुल कुटार भी निरीक्षण में मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने मिलकर इतनी गंभीरता दिखाई कि देखने वालों को लगा जैसे चुनाव नहीं, बल्कि कोई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होने वाला है।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि “निरीक्षण हर चुनाव से पहले होता है, और व्यवस्था हर बार ‘सुधारने’ का वादा करती है… लेकिन चुनाव खत्म होते ही व्यवस्था भी छुट्टी पर चली जाती है।”
अब देखने वाली बात यह होगी कि जो व्यवस्थाएँ निरीक्षण के दौरान इतनी चुस्त-दुरुस्त नजर आईं, क्या वे मतदान के दिन भी उतनी ही सतर्क रहेंगी या फिर लोकतंत्र को एक बार फिर ‘जुगाड़ तंत्र’ के भरोसे छोड़ दिया जाएगा।
फिलहाल तो रीठी में लोकतंत्र पूरी तरह से “निरीक्षण मोड” में है — अब असली परीक्षा मतदान के दिन होगी, जब यह तय होगा कि व्यवस्था सिर्फ दिखावे के लिए थी या सच में जनता के लिए।
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