प्रशिक्षण से बदलेगा गांव… या फिर फाइलों का वजन? मझगवां फाटक में ‘समग्र विकास’ पर गूंजे भाषण

सह संपादक उमेश त्रिपाठी दर्पण 24 न्यूज 

कटनी। गांवों के समग्र विकास की राह अब शायद प्रशिक्षण कार्यशालाओं से होकर ही गुजरेगी। कम से कम मझगवां फाटक में आयोजित एक दिवसीय सैक्टर स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को देखकर तो ऐसा ही लगा, जहां भाषणों, प्रेजेंटेशन और प्रमाणपत्रों के बीच विकास का रास्ता खोजने की कोशिश की गई।

मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद विकासखंड कटनी के सेक्टर क्रमांक-1 मझगवां फाटक में नवांकुर संस्था दिव्या जन कल्याण समिति बोहता के तत्वावधान में ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों और नवांकुर सखियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण से हुई, क्योंकि गांव का विकास हो या प्रशिक्षण—शुरुआत दीप से ही होती है, बाकी का काम फाइलें संभाल लेती हैं।

कार्यक्रम में जनपद सदस्य नंदलाल कोरी, सरपंच संतोष निषाद, आनंद विभाग के डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम लीडर अनिल कांबले, जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक डॉ. तेज सिंह केशवाल और विकासखंड समन्वयक बालमुकुंद मिश्र विशेष रूप से उपस्थित रहे। मंच पर बैठे सभी अतिथियों ने गांव के विकास पर अपने-अपने अनुभव साझा किए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि विकास के लिए भाषण भी उतने ही जरूरी हैं जितनी योजनाएं।

प्रशिक्षण के पहले सत्र में बालमुकुंद मिश्र ने “मां भारती की स्वर्णिम माटी हमें है चंदन” गीत के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रेरित किया। प्रेरणा इतनी प्रबल रही कि प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि प्रशिक्षण क्यों जरूरी है—शायद इसलिए कि गांव के विकास से पहले प्रशिक्षण का विकास होना भी जरूरी है।

दूसरे सत्र में डॉ. तेज सिंह केशवाल ने समग्र ग्राम विकास पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि प्रस्फुटन समितियां गांव के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि ग्रामीणों का मानना है कि अगर समितियों के साथ-साथ सड़कों, नालियों और पानी की भी भूमिका थोड़ी बढ़ जाए तो विकास और तेज हो सकता है।

तीसरे सत्र में मनीष पांडेय ने प्रस्फुटन समितियों की कार्यप्रणाली और दस्तावेजों के महत्व पर प्रकाश डाला। दस्तावेजों के रखरखाव की इतनी विस्तार से जानकारी दी गई कि कई प्रतिभागियों को लगा कि शायद विकास बाद में होगा, लेकिन फाइलें जरूर मजबूत हो जाएंगी।

कार्यशाला के दौरान महाराष्ट्र के आदर्श ग्राम हिवरे बाजार का प्रोजेक्टर के माध्यम से उदाहरण भी दिखाया गया, जिससे ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया कि अगर वहां विकास हो सकता है तो यहां भी हो सकता है—बस थोड़े और प्रशिक्षण, कुछ और बैठकें और थोड़ी और प्रेरणा चाहिए।

चौथे सत्र में संस्थाओं के पंजीयन, प्रबंधन और बैठकों की प्रक्रिया पर जानकारी दी गई। कुल मिलाकर प्रशिक्षण में यह स्पष्ट किया गया कि विकास की प्रक्रिया लंबी है, लेकिन कागजी प्रक्रिया उससे भी लंबी हो सकती है।

अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया और नवांकुर संस्था के सेक्टर प्रभारी राजू यादव ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के प्रतिनिधियों और नवांकुर सखियों की उपस्थिति रही।

फिलहाल गांव के लोग प्रशिक्षण से मिले प्रमाणपत्र और ज्ञान के साथ घर लौट गए हैं। अब देखना यह है कि अगली कार्यशाला तक गांव में विकास दिखाई देता है या फिर सिर्फ नई फाइलें और नए प्रमाणपत्र ही तैयार होते हैं

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